मैं परदेसी हूँ पहली बार आया हूँ भजन (मुखड़ा)
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ,
पहली बार आया हूँ,
पहली बार आया हूँ,
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ।।
(अंतरा)
ऐ लाल चुनरिया वाली बेटी!
ये तो बताओ,
माँ के भवन जाने का रास्ता,
किधर से है?
इधर से है या उधर से है।
सुन रे भक्त परदेसी,
इतनी जल्दी है कैसी?
अरे, ज़रा घूम लो, फिर लो,
रौनक देखो कटरा की।
जाओ, तुम वहाँ जाओ,
पहले पर्ची कटाओ,
ध्यान मैया का धरो,
एक जयकारा लगाओ,
चले भक्तों की टोली,
संग तुम मिल जाओ,
तुम्हे रास्ता दिखा दूँ,
मेरे पीछे चले आओ।
ये है दर्शन ड्योढ़ी,
दर्शन पहला है ये,
करो यात्रा शुरू तुम,
जय माता दी कह।
अरे, यहाँ तलक तो लायी,
बेटी, आगे भी ले जाओ ना,
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ।।
(दूसरा अंतरा)
इतना शीतल जल,
ये कौन सा स्थान है, बेटी?
ये है बाणगंगा,
पानी अमृत समान,
होता तन-मन पावन,
करो यहाँ स्नान,
माथा मंदिर में टेकों,
करो आगे प्रस्थान,
चरण पादुका वो आई,
जाने महिमा जहान।
मैया, जग कल्याणी,
माफ करना मेरी भूल,
मैंने माथे पे लगाई,
तेरे चरणों की धूल।
अरे, यहाँ तलक तो लायी,
बेटी, आगे भी ले जाओ ना,
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ।।
(तीसरा अंतरा)
ये हम कहाँ आ पहुँचे,
ये कौन सी जगह है, बेटी?
ये है आदिकुमारी,
महिमा है इसकी भारी,
गर्भजून वो गुफा है,
कथा है जिसकी न्यारी।
भैरव जती इक जोगी,
मास-मदिरा आहारी,
लेने माँ की परीक्षा,
बात उसने विचारी।
मास और मद माँगे,
मति उसकी थी मारी,
हुई अंतर्ध्यान माता,
आया पीछे दुराचारी।
नौ महीने इसी में,
रही मैया अवतारी,
इसे गुफा गर्भजून,
जाने दुनिया ये सारी।
और गुफा से निकलकर,
माता वैष्णो रानी,
ऊपर पावन गुफा में,
पिंडी रूप में प्रकट हुई।
धन्य-धन्य मेरी माता,
धन्य तेरी शक्ति,
मिलती पापों से मुक्ति,
करके तेरी भक्ति।
अरे, यहाँ तलक तो लायी,
बेटी, आगे भी ले जाओ ना,
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ।।
(चौथा अंतरा)
ओह मेरी मैया!
इतनी कठिन चढ़ाई,
ये कौन सा स्थान है, बेटी?
देखो ऊँचे वो पहाड़,
और गहरी ये खाई,
ज़रा चढ़ना संभल के,
हाथी मत्थे की चढ़ाई।
टेढ़े-मेढ़े रस्ते हैं,
पर डरना ना भाई,
देखो सामने वो देखो,
सांझी छत की दिखाई।
परदेसी, यहाँ कुछ खा लो, पी लो,
थोड़ा आराम कर लो,
बस थोड़ी यात्रा और रह गई है।
ऐसा लगता है मुझको,
मुकाम आ गया,
माता वैष्णो का निकट ही,
धाम आ गया।
अरे, यहाँ तलक तो लायी,
बेटी, आगे भी ले जाओ ना,
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ।।
(पाँचवाँ अंतरा)
वाह, क्या सुंदर नज़ारा है!
आखिर हम माँ के भवन,
पहुंच ही गए ना,
ये पावन गुफा किधर है, बेटी?
देखो, सामने गुफा है,
मैया रानी का द्वारा,
माता वैष्णो ने यहाँ,
रूप पिंडियों का धारा।
चलो, गंगा में नहा लो,
थाली पूजा की सजा लो,
लेके लाल-लाल चुनरी,
अपने सर पे बाँध लो।
जाके सुंदर गुफा में,
माँ के दर्शन पा लो,
बिन माँगे ही यहाँ से,
मन इच्छा फल पा लो।
गुफा से बाहर आकर,
कंजके बिठाते हैं,
उनको हलवा-पूरी और,
दक्षिणा देकर,
आशीर्वाद पाते हैं।
और लौटते समय,
बाबा भैरवनाथ के दर्शन करने से,
यात्रा संपूर्ण मानी जाती है।
आज तुमने ‘सरल’ पे,
उपकार कर दिया,
दामन खुशियों से,
आनंद से भर दिया।
भेज बुलावा अगले बरस भी,
परदेसी को बुलाओ माँ,
हर साल आऊँगा,
जैसे इस बार आया हूँ।
मैं परदेसी हूँ,
पहली बार आया हूँ,
दर्शन करने, मैया के,
दरबार आया हूँ।।
VIDEO
Main Pardesi Hoon [Full Song] Jagran Ki Raat- Vol.10
Singer: Anuradha Paudwal,Udit Narayan Music Director: Anand Raj Anand Lyricist: Saral Kavi Album: Maiya Rani
भक्त माँ के दरबार की पहली यात्रा पर है और यात्रा के हर महत्वपूर्ण स्थान जैसे बाणगंगा, चरणपादुका, गर्भजून गुफा, सांझी छत आदि का उल्लेख करता है। वह माँ की कृपा के लिए प्रार्थना करता है और माँ के आशीर्वाद से हर साल आने की इच्छा प्रकट करता है।