कुकड़ कू बोल रहा मुर्गा मातारानी भजन

कुकड़ कू बोल रहा मुर्गा मातारानी भजन

कुकड़ कू, कुकड़ कू,
बोल रहा मुर्गा।

जीवन तपती धूप है,
तू शीतल जल धार,
थपकी, लोरी में छुपा है,
माँ का सारा प्यार।।

कुकड़ कू, कुकड़ कू,
बोल रहा मुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।


मुर्गा की बांग सुन,
उठ गई चिडैया,
चहचहा के हमसे,
ओ कह रही चिड़ैया,
हम तो उठ गए हैं,
तुम भी उठो माई दुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।

ब्रह्म मुहूर्त की,
शुभ घड़ी है प्यारी,
पूजा की थाल लिए,
आया है पुजारी,
ब्रह्म घड़ी चूके ना,
सुनो माई दुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।

जल धार में हम तो,
कब से हैं ठाड़े,
भोर हो गई, पंडा,
खोल दे किवाड़े,
दास सजन जगाता है,
सुनो माई दुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।

आरती करे तोरी,
हम यहां सकारे,
ढोल, शंख लेके हम,
आए तेरे द्वारे,
शंख ध्वनि सुनके,
अब जाग माई दुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।

कुकड़ कू, कुकड़ कू,
बोल रहा मुर्गा,
हो गयो सबेरा,
अब जाग माई दुर्गा।।

Kukdu Ku Kukdu Ku // Devotional song

➤Album :- Panda Ko Lag Gayi Chudailan
➤Song :- Kukdu Koo Bol Raho Murga
➤Singer :- Ramsewak Shrivastav
➤Music :- Bablu Mathews, Shivnandan Chauhan
➤Writer :- Ramsewak Shrivastav
➤ Label :- Vianet Media
➤ Sub Label :- Sona Cassettes 

मुर्गे की कुकड़ कू बांग से सबेरा हो जाता है, माँ दुर्गा को जगाने की पुकार गूँज उठती है। तपती धूप में शीतल जलधारा बरसाते लोरी थपकी से भरा माँ का प्यार हर दिल को छू लेता। चिड़िया चहचहाती ब्रह्म मुहूर्त में पुजारी थाल लिए आता, जलधार में ठाढ़े भक्त किवाड़ खोलने को बुलाते। साधकों को इश्वर का आशीर्वाद भोर की ये पुकार से मिलता है, जैसे कोई अपना आँखें खोल दे नई रोशनी में।

ढोल शंख की ध्वनि से आरती सजती द्वार पर, जगाने को दास सजन पुकारते मन से। जीवन का हर पल माँ की कृपा से महक उठता, सुबह की शुभ घड़ी चूक न जाए कोशिश करते सब। जैसे बच्चा माँ की गोद पुकारे हर भोर, वैसे प्रेम जागृत हो उठता है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री दुर्गा माँ जी! जय श्री माई जी! 

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