गुरासा बिना विद्या कुण रे पढ़ावे भजन

गुरासा बिना विद्या कुण रे पढ़ावे भजन

गुरासा बिना विद्या,
कुण रे पढ़ावे जी,
अरे कैसे पढ़ोला पोती,
कैसे पढ़ोला पोती,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति,
अरे कैसे करोला भक्ति भई रे,
कैसे करोला भक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति।

अरे ज्ञान ध्यान तो,
कुण बतावे जी,
अरे ज्ञान ध्यान तो,
कुण बतावे जी,
अरे कैसे आवे जुक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति,
अरे कैसे करोला भक्ति भई रे,
कैसे करोला भक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति।

अरे गम बिना गेली,
तू भई अलबेली जी,
अरे गम बिना,
तू भई अलबेली जी,
अरे विरता फिरे भक्ति,
विरता फिरे भक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति,
अरे कैसे करोला भक्ति भई रे,
कैसे करोला भक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति।

अरे हेमनाथ कहे सुनो मन मेरा,
अरे हेमनाथ कहे सुनो मन मेरा,
अरे सबल धणी री शक्ति,
सबल धणी री शक्ति रे,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति,
अरे कैसे करोला भक्ति भई रे,
कैसे करोला भक्ति,
ए गुरासा बिना होवे न मुक्ति।



कैसे पढ़ो ला पोती || SANT KANHAIYALAL || कानपुरा लाइव 2018

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गुरु के बिना विद्या कैसे पढ़े, पोती को सिखावें कौन। ज्ञान-ध्यान का रास्ता बिना गुरु न खुले, भक्ति की जुगत न आए। मन अलबेला घूमे, गम न सहे तो भक्ति अधूरी रह जाए। हेमनाथ जी कहते हैं सुनो मन, सबल धनी की शक्ति ही तो है। गुरु मिले तो मुक्ति का द्वार खुलता है, जीवन सार्थक हो जाता।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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