भोजन मन्त्र लिरिक्स भोजन से पूर्व का मन्त्र
विचार मन में करना है,
किस हेतु से इस शरीर का,
रक्षण पोषण करना है,
हे परमेश्वर,
एक प्रार्थना,
नित्य तुम्हारे चरणो में,
लग जाये तन मन धन मेरा,
विश्व धर्म की सेवा में।
भोजन मंत्र:
ब्रहमार्पणं,
ब्रहमहविर्ब्रहमाग्नौ,
ब्रहमणा हुतम्,
ब्रहमैव तेन,
गन्तव्यं,
ब्रहमकर्मसमाधिना।
ॐ सह नाववतु,
सह नौ भुनक्तु,
सह वीर्यं करवावहै,
तेजस्विनावधीतमस्तु,
मा विद्विषावहै।
ॐ शान्ति: शान्ति: शान्ति:।
Sanskrit Mantra Bhojan Mantra (with Lyrics) | भोजन मन्त्र
भोजन से पहले मन में यह संकल्प जागता है कि यह शरीर केवल सांसारिक सुखों के लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर की सेवा और विश्व के कल्याण के लिए पोषित हो। जैसे भक्त अपने तन, मन और धन को प्रभु के चरणों में अर्पित करता है, वैसे ही वह प्रार्थना करता है कि उसका हर कर्म विश्व धर्म की सेवा में लगे। भोजन मंत्र के साथ, ब्रह्म को ही अर्पण मानकर, मन यह विश्वास रखता है कि हर कार्य, हर ग्रास प्रभु की समाधि में डूबकर सार्थक हो जाता है। यह सुंदर भजन और मंत्र मन को शुद्ध करने और जीवन को प्रभु की भक्ति व सेवा की राह पर ले जाने की प्रेरणा देते हैं, ताकि हर पल शांति और सत्य के रंग में रंग जाए।
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Author - Saroj Jangir
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