हिंदु युवकों आज का युग धर्म शक्ति उपासना
धर्म शक्ति उपासना है,
बस बहुत अब हो चुकी है,
शांति की चर्चा यहाँ पर,
हो चुकी अति ही अहिंसा,
सत्य की चर्चा यहाँ पर,
ये मधुर सिद्धान्त,
रक्षा देश की पर कर ना पाए,
ऐतिहासिक सत्य है,
यह सत्य अब पहचानना है।
हम चले थे विश्व भर को,
प्रेम का संदेश देने,
किंतु जिन को बंधु समझा,
आ गया वह प्राण लेने,
शक्ति की हम ने उपेक्षा की,
इसी का दंड पाया,
यह प्रकृति का ही नियम है,
अब हमे यह जानना है।
जग नही सुनता कभी,
दुर्बल जनों का शान्ति प्रवचन,
सिर झुकाता है उसे जो,
कर सके रिपु मान मर्दन,
हृदय मे हो प्रेम लेकिन,
शक्ति भी कर मे प्रबल हो,
यह सफलता मन्त्र है,
करना इसी की साधना है।
हिंदु युवकों आज का युग,
धर्म शक्ति उपासना है,
हिंदु युवकों आज का युग,
धर्म शक्ति उपासना है।
Hindu yuvko aaj ka yug dharm! हिंदु युवकों आज का युग धर्म! Desh bhakti song!
यह भजन भी देखिये
हमको है अभिमान देश का लिरिक्स
तन मन धन से सदा सुखी हो भारत
आज के युग में धर्म की सेवा केवल शांति और अहिंसा के अधीन नहीं रह सकती, बल्कि शक्ति की उपासना होना आवश्यक है। यह गीत इस विश्वास को प्रस्तुत करता है कि शांति की चर्चा तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक शक्ति के साथ सत्य और धर्म का पालन न हो। प्रेम का संदेश विश्व को फैलाने के प्रयास में, उन लोगों ने जो मित्र समझे जाते थे, प्राण लेने वाले भी साबित हुए। इसलिए अब वक्त है कि कमजोरों के शांतिप्रिय प्रवचनों को जग ठीक से न सुने, बल्कि जो शक्ति और साहस से दुश्मनों का सामना कर सके, उसी को सम्मान मिले। इसमें यह भी कहा गया है कि हृदय में प्रेम के साथ-साथ कर्म में शक्ति होनी चाहिए, क्योंकि यही सफलता का मंत्र है। अंत में मातृभूमि की पीड़ा को कम करने के लिए शक्ति का संचय करने और उसे उपासना का रूप देने का आग्रह है।
