हे कर्म भूमि भारत, हे जन्म भूमि भारत, हे कर्म भूमि भारत, हे वंदनीय भारत, अभिनंदनीय भारत, जीवन सुमन चढ़ाकर, आराधना करेंगे, तेरी जनम जनम भर, हम वंदना करेंगे, हम अर्चना करेंगे।
महिमा महान तू है, गौरव निधान तू है, तू प्राण है हमारी, जननी समान तू है, तेरे लिये जियेंगे, तेरे लिये मरेंगे, तेरे लिये जनम भर, हम सधना करेंगे, हम अर्चना करेंगे।
जिसका मुकुट हिमालय, जग जगमगा रहा है, सागर जिसे रतन की, अंजुली चढ़ा रहा है, वह देश है हमारा, ललकार कर कहेंगे, उस देश के बिना हम, जीवित नही रहेंगे, हम अर्चना करेंगे।
जो संस्कृति अभी तक, दुर्जेय सी बनी है, जिसका विशाल मंदिर, आदर्श का धनी है, उसकी विजय ध्वजा ले, हम विश्व में चलेंगे, सुर संस्कृति पवन बन, हर कुंज में बहेंगे, हम अर्चना करेंगे।
शाश्वत स्वतंत्रता का, जो दीप जल रहा है, आलोक का पथिक जो, अविराम चल रहा है, विश्वास है कि पल भर, रूकने उसे न देंगे, उस दीप की शिखा को, ज्योतित सदा रखेंगे, हम अर्चना करेगें।
समाज में सकारात्मकता का वातावरण बने इसलिए आवश्यक है की हमारी सोच सकारात्मक हो, भाव सकारात्मक हो एवं अच्छी बातों, प्रेरक कथाओं के माध्यम से जन-जन की सोच भी सकारात्मक बने. यह ब्लॉग केवल और केवल अच्छी बातों को आप के समक्ष रखने का प्रयास भर है.. आप प्रेरक कथा, गीत, सूक्तिओं एवं वीडियो को देखकर संवाद के माध्यम से हौसला बढ़ाते रहेंगे… संस्कार शिक्षा के विषय पर आधारित सामग्री का संग्रह. इस चैंनल पर राष्ट्रभक्ति गीत, अनमोल वचन, संस्कार शिक्षा हेतु आवश्यक सामग्री उपलब्ध रहेगी.