माँ वैष्णो मंदिर को सोने का बनाना है
माता के मंदिर को,
सोने का बनाना है,
सेवा में करो अर्पण,
जो कुछ भी चढ़ना है,
माता के मंदिर को,
सोने का बनाना है,
सेवा में करो अर्पण,
जो कुछ भी चढ़ना है।
इस भवन निराले का,
यह शहर अंबाले का,
चर्चा हो जमाने में,
इसे ऐसा सजाना है।
नही कोई जबरदस्ती,
करो दान यथा शक्ति,
थोडा है थोडा दो,
कैसा शर्माना है।
जो पास हमारे है,
उस माँ का दिया तो है,
उसे अर्पण करने में,
कैसा घबराना है।
गुलशन जी कहते है,
दर्शन जी बताते है,
ये दान शान्त तेरा,
कभी व्यर्थ ना जाना है।
माता के मंदिर को,
सोने का बनाना है,
सेवा मे करो करो अर्पण,
जो कुछ भी चढ़ाना है।
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