किसे दी गवाची मुंदरी, किसे दी गवाची फुलकारी, मेरा ता गवाचेया दिल, जेड़ा ले गया श्याम मुरारी।
वृन्दावन की गलिओं में, मक्खाना दा चोर फिरे, सखिओं ने देख लिया, फिर दौड़ गया बनवारी, किसे दी गवाची मुंदरी, किसे दी गवाची फुलकारी, मेरा ता गवाचेया दिल, जेड़ा ले गया श्याम मुरारी।
रल मिल सखिया ने, यमुना ते गईआं ने, चीर चुरा के ले गया, कित्थे जावां मैं शर्म दी मारी, किसे दी गवाची मुंदरी, किसे दी गवाची फुलकारी, मेरा ता गवाचेया दिल, जेड़ा ले गया श्याम मुरारी।
सखिया तो पुछदे ने, किसे दा मैं की चुकेया, दस्सो मेरी सखियो नी, जेहडा शोर मचाया भारी, किसे दी गवाची मुंदरी, किसे दी गवाची फुलकारी, मेरा ता गवाचेया दिल, जेड़ा ले गया श्याम मुरारी।
किसे दा तू दूध लुटेया, किसे दा मख्खन लुटेया, किसे दा तू सूट चुकेया, किसे दी चुक लई साडी, किसे दी गवाची मुंदरी, किसे दी गवाची फुलकारी, मेरा ता गवाचेया दिल, जेड़ा ले गया श्याम मुरारी।