रात श्याम मेरे सपने में आया
रात श्याम मेरे सपने में आया,
कैसे कह दुं के आया नहीं है,
उस ने मुझ को गले से लगाया,
कैसे कह दुं लगाया नहीं है।
सिर पे मोर मूकूट था उसके,
गल में मोतीयों की माला,
आंख में उसने काजल लगाया,
कैसे कह दूं लगाया नहीं है।
हाथ में बांसूरी थी उसके,
मोहनी सुर भरी थी उस में,
उसने सारे जगत को नचाया,
कैसे कह दूं नचाया नहीं है।
देख कर आंसू मेरे नयनों में,
ये बोला वो नटखट मूझसे,
मैं सदा तेरे तेरे दिल में समाया,
कैसे कह दूं समाया नहीं है।
पास आ कर के मेरे वो बैठा,
मैंने सांवरी सूरत को देखा,
उसने अपना वो रूप दिखाया,
कैसे कह दूं दीखाया नहीं है।
रात श्याम मेरे सपने में आया,
कैसे कह दुं के आया नहीं है,
उस ने मुझ को गले से लगाया,
कैसे कह दुं लगाया नहीं है।
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं