तेरी पूजा करूं दिन रात भजन

तेरी पूजा करूं दिन रात माता रानी भजन

 
तेरी पूजा करूं दिन रात भजन

तेरी पूजा करूं दिन रात,
माँ अम्बे, तेरी पूजा,
करूं दिन रात,
जीवन की हर डगर पे,
हरदम रहना मेरे साथ,
तेरी पूजा करूं दिन रात,
माँ अम्बे,
तेरी पूजा करूं दिन रात।

सौ बार चाहे,
मेरी आस्था परखना,
लाल लाल चुनरी की,
छाया भी ना रखना,
मैं जो जपती,
माला तेरे नाम की,
मेरे लिये यात्रा है,
वही चारों धाम की,
मेरे लिये यात्रा है,
वही चारों धाम की,
चरण तुम्हारे छोड़ूं ना चाहे,
कैसे हो हालात,
तेरी पूजा करूं दिन रात,
माँ अम्बे,
तेरी पूजा करूं दिन रात।

मुझे तेरी ममता से,
पुरा विश्वास माँ,
डोलने ना दोगी कभी,
मेरा विश्वास माँ,
डोलने ना दोगी कभी,
मेरा विश्वास माँ,
मेरे रोम रोम में,
रमी तू ही रहना,
मैंने तेरी ममता की,
गरिमा में रहना,
संकट की कभी,
आये जो घड़िया,
थामना मेरा हाथ,
तेरी पूजा करूं दिन रात,
माँ अम्बे,
तेरी पूजा करूं दिन रात।

तेरे ही ध्यान में खोये,
जो तेरा भक्त माँ,
बाल भी ना बांका,
उन भक्त का होये माँ,
तू है दयावान मुझे,
जरा भी नी शक माँ,
कष्ट भी आने ना दोगी,
कभी मेरे तक माँ,
तेरे सिवा तेरे भक्तो की,
तेरे सिवा तेरे भक्तो की,
कोई ना समझे बात,
तेरी पूजा करूं दिन रात,
माँ अम्बे,
तेरी पूजा करूं दिन रात।

भजन श्रेणी : माता रानी भजन (Mata Rani Bhajan)

Maa Vaishno Bhajan- Teri pooja karu din raat

 
माँ की उपासना में जो भाव झलकता है, वह केवल आराधना नहीं—जीवन के हर क्षण में सुरक्षा, स्नेह और अडिग विश्वास की शरण है। माँ अम्बे की छवि यहाँ केवल जगतजननी की नहीं, बल्कि उस अटल आश्वासन की तरह है जो हर भय को मिटा देती है। जब कोई साधक कहता है कि वह दिन–रात उनकी पूजा करेगा, तो यह कर्मकांड नहीं, बल्कि आत्मा की पुकार होती है—कि हर सांस में वही नाम रहे, हर कदम पर वही मार्गदर्शक बनें। माँ की चुनरी का प्रतीक यहाँ सुरक्षा का है—एक ऐसी लाल आभा जो आलोक बनकर जीवन को आच्छादित कर लेती है। यही मातृशक्ति का करुणामय रूप है—जो परखती भी है, पर छो‍ड़ती नहीं।

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