कोरी मटकी में दही जमे कोन्या राधा

कोरी मटकी में दही जमे कोन्या राधा बिना श्याम

 
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या राधा बिना श्याम Kori Mata Me Dhahi Lyrics, Kori Mataki Me Dahi Jame Konya

कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

बागा बागा मैं फिर आई,
मन का ऐ फुल खिला कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

कुए कुए मैं फिर आई,
मन की या प्यास बुझे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

ताला ताला मैं फिर आई,
मन की या झाल डटे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

गंगा जमुना मैं नहा आई,
मन का ऐ मैल कट्या कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

मंदिर मंदिर मैं फिर आई,
मन की ज्योत जगे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

सत्संग कीर्तन मैं सुन आई,
गुरु बिना ज्ञान मिले कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।

कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या,
कोरी मटकी में दही जमे कोन्या,
राधा बिना श्याम मिले कोन्या।


कोरी मटकी में दही जमे कोन्या राधा बिना श्याम मिले कोन्या | Radha Krishna Bhajan | Sheela Kalson
Title ▹Kori Matki Me Dahi Jame Konya Radha Bina Shyam Mile Konya
Artist ▹Sonia
Singer ▹ Sheela Kalson
Music ▹Pardeep Panchal
Lyrics & Composer ▹Traditional
Editing ▹KV Sain
Cameraman ▹Gulshan Bawa

यह भाव प्रेम और भक्ति की उसी अनिवार्यता को समझाता है जो बिना मिलन के अधूरी रहती है। “कोरी मटकी में दही जमे कोन्या” — यह तुलना सरल होकर भी गहरी है; जिस तरह बिना संस्कार के मटकी में दही नहीं जमता, वैसे ही बिना प्रेम के भक्ति फल नहीं देती। यहाँ राधा केवल एक स्त्री नहीं, वह प्रेम का प्रतीक हैं—वह वह चेतना हैं जो श्याम को प्राप्त करने की सर्वथा आवश्यक शर्त है। राधा रहित श्याम की कल्पना अधूरी है, जैसे स्रोत बिना सरिता या दीप बिना ज्योति। इस भाव में प्रेम की वह शुद्धता झलकती है जो साधना का सार बन जाती है।

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