अरि अवध में बाजै बधैया कौशल्या के ललना भजन
अरि अवध में बाजै बधैया कौशल्या के ललना भजन
अरि अवध में बाजै बधैया,
कौशल्या के ललना भई,
अरे नौमी तिथि, अति शीत न घामा,
कौशल्या के ललना भई।।
अरि राम जी के भइले जनमवा,
चला हो, करि आई दरशनवा।।
रानी कौशल्या अरि पलना झुलावैं,
रानी कौशल्या पलना झुलावैं,
पलना झुलावैं, गुइयाँ पलना झुलावैं,
पलना झुलावैं, रामा पलना झुलावैं,
रानी कौशल्या पलना झुलावैं,
देखि के विहसे परनवा।।
माई कौशल्या बलि-बलि जावैं,
प्रकटे हैं राम भगवानवा।।
होत आनंद, अवध नगरी में,
शोभवा न जाई बरनवा।।
तुलसीदास, स्वामी सुखसागर,
सुंदर लाल सलोनवा।।
कौशल्या के ललना भई,
अरे नौमी तिथि, अति शीत न घामा,
कौशल्या के ललना भई।।
अरि राम जी के भइले जनमवा,
चला हो, करि आई दरशनवा।।
रानी कौशल्या अरि पलना झुलावैं,
रानी कौशल्या पलना झुलावैं,
पलना झुलावैं, गुइयाँ पलना झुलावैं,
पलना झुलावैं, रामा पलना झुलावैं,
रानी कौशल्या पलना झुलावैं,
देखि के विहसे परनवा।।
माई कौशल्या बलि-बलि जावैं,
प्रकटे हैं राम भगवानवा।।
होत आनंद, अवध नगरी में,
शोभवा न जाई बरनवा।।
तुलसीदास, स्वामी सुखसागर,
सुंदर लाल सलोनवा।।
राम जी के भइले जनमवा | #ayodhya #प्राण_प्रतिष्ठा By Malini Awasthi | Hit Awadhi Song
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अवध में बाजे बधाईया….
कौशल्या के ललना भए
अरे बाजे ढोल मृदंग शहनाई….
कौशल्या के ललना भए
कौशल्या के ललना भए
अरे बाजे ढोल मृदंग शहनाई….
कौशल्या के ललना भए
अयोध्या की पावन धरती पर प्रभु श्रीराम के प्रकट होने का शुभ अवसर ऐसा मंगलमय क्षण है, जब पूरा वातावरण आनंद, उल्लास और भक्ति से भर उठता है। प्रकृति भी मानो इस दिव्य उत्सव में सहभागी बन जाती है और हर ओर शुभता की मधुर छटा बिखर जाती है। माता कौशल्या की गोद में बालरूप श्रीराम का दर्शन पाकर वात्सल्य, प्रेम और ममता अपने सर्वोच्च रूप में प्रकट होते हैं। झूले में विराजमान उस मनोहर बाल स्वरूप को देखकर प्रत्येक हृदय श्रद्धा और स्नेह से पुलकित हो उठता है। उस दिव्य मुस्कान में करुणा, धर्म और मर्यादा का उज्ज्वल भविष्य दिखाई देता है, जो समस्त संसार के कल्याण का संदेश लेकर आया है।
अयोध्या का प्रत्येक घर, प्रत्येक मार्ग और प्रत्येक मन इस शुभ जन्मोत्सव की खुशी में डूब जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं देवता भी इस दिव्य लीला के साक्षी बनकर मंगलगान कर रहे हों। प्रभु का यह अवतरण केवल एक जन्म नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, करुणा और आदर्श जीवन की स्थापना का पावन संदेश है। उनके बाल स्वरूप का स्मरण मन को निर्मल करता है और जीवन में प्रेम, विनम्रता तथा ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संचार करता है। जय श्रीराम!
अयोध्या का प्रत्येक घर, प्रत्येक मार्ग और प्रत्येक मन इस शुभ जन्मोत्सव की खुशी में डूब जाता है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं देवता भी इस दिव्य लीला के साक्षी बनकर मंगलगान कर रहे हों। प्रभु का यह अवतरण केवल एक जन्म नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, करुणा और आदर्श जीवन की स्थापना का पावन संदेश है। उनके बाल स्वरूप का स्मरण मन को निर्मल करता है और जीवन में प्रेम, विनम्रता तथा ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास का संचार करता है। जय श्रीराम!
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Author - Saroj Jangir
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