दरबार में पड़ा हूँ कब लोगे सुध हमारी भजन
दरबार में पड़ा हूँ कब लोगे सुध हमारी भजन
अगर कलियुग में,
बाबा श्याम का,
अवतार न होता,
तो निर्बल दीन दुखियों का,
कभी उद्धार न होता,
बनके लाचार फँसे रहते,
जग के दलदल में,
जो सजा खाटू में,
बाबा श्याम का,
दरबार न होता।
मांगने वाले खाली न लौटे,
कितनी मिली खैरात न पूछो,
उनकी कृपा तो उनकी कृपा है,
उनकी कृपा की बात न पूछो।
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी,
गुजरे कई ज़माने,
गुजरे कई ज़माने,
कब आएगी मेरी बारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
मीरा को तुमने तारा,
प्रह्लाद को उबारा,
एक मित्र था सुदामा,
एक मित्र था सुदामा,
कैसी निभाई यारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
गर खाली हाथ जाऊँ,
दरबार से तुम्हारे,
बदनामियाँ जहाँ में,
बदनामियाँ जहाँ में,
सरकार हो तुम्हारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
दाता दुःखहारी,
मैं दीन अति दुखारी,
जोड़ी भी खूब बाबा,
जोड़ी भी खूब बाबा,
अच्छी बनी हमारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
जीवन की नाव बाबा,
अब डूबने लगी है,
माँझी किशन बनो अब,
माँझी किशन बनो अब,
लीले की कर सवारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी,
गुजरे कई ज़माने,
गुजरे कई ज़माने,
कब आएगी मेरी बारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
बाबा श्याम का,
अवतार न होता,
तो निर्बल दीन दुखियों का,
कभी उद्धार न होता,
बनके लाचार फँसे रहते,
जग के दलदल में,
जो सजा खाटू में,
बाबा श्याम का,
दरबार न होता।
मांगने वाले खाली न लौटे,
कितनी मिली खैरात न पूछो,
उनकी कृपा तो उनकी कृपा है,
उनकी कृपा की बात न पूछो।
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी,
गुजरे कई ज़माने,
गुजरे कई ज़माने,
कब आएगी मेरी बारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
मीरा को तुमने तारा,
प्रह्लाद को उबारा,
एक मित्र था सुदामा,
एक मित्र था सुदामा,
कैसी निभाई यारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
गर खाली हाथ जाऊँ,
दरबार से तुम्हारे,
बदनामियाँ जहाँ में,
बदनामियाँ जहाँ में,
सरकार हो तुम्हारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
दाता दुःखहारी,
मैं दीन अति दुखारी,
जोड़ी भी खूब बाबा,
जोड़ी भी खूब बाबा,
अच्छी बनी हमारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
जीवन की नाव बाबा,
अब डूबने लगी है,
माँझी किशन बनो अब,
माँझी किशन बनो अब,
लीले की कर सवारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी,
गुजरे कई ज़माने,
गुजरे कई ज़माने,
कब आएगी मेरी बारी,
दरबार में पड़ा हूँ,
कब लोगे सुध हमारी।
DARBAR ME PADA HUN BY SURBHI CHATUVEDI
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This is soulful bhajan by Surbhi Chaturvedi and belongs to devotees and these believers who make faith to lord baba Shyam
कलयुग के दलदल में निर्बल दीन दुखी लाचार फंसे रहते बिना अवतार के उद्धार असंभव होता। खाटू दरबार सजता तो मांगने वाले खाली न लौटते कृपा खैरात बरसती। मीरा तारती प्रह्लाद उबारती सुदामा यारी निभाती दरबार सुध लेती नाव डूब माझी बन पार लगाती जोड़ी अच्छी बनाती। खाटू वाले बाबा श्याम बारबार अवतरित हो दीनबंधु बनते निर्बल रक्षा करते। दरबार कृपा पात्र सब बनाते मीरा प्रह्लाद सुदामा लीला से जग जपते। दुख हारी दातार जीवन नाव सवारी करवाते किशन मझी बन भक्त धन्य करते।
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Author - Saroj Jangir
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