श्री स्वामी समर्थ गायत्री मंत्र भजन
विद्महे,
योगिराजाय,
धीमहि,
तन्नो स्वामिः,
प्रचोदयात्।
ॐ परमहंसाय,
विद्महे,
योगिराजाय,
धीमहि,
तन्नो स्वामिः,
प्रचोदयात्।
ॐ परमहंसाय,
विद्महे,
योगिराजाय,
धीमहि,
तन्नो स्वामिः,
प्रचोदयात्।
ॐ परमहंसाय,
विद्महे,
योगिराजाय,
धीमहि,
तन्नो स्वामिः,
प्रचोदयात्।
ॐ परमहंसाय,
विद्महे,
योगिराजाय,
धीमहि,
तन्नो स्वामिः,
प्रचोदयात्।
विद्महे - May we know (or realize)
योगिराजाय - the King of Yogis (referring to Swami Samarth)
धीमहि - May we meditate (or focus our mind)
तन्नो स्वामिः - May that Swami Samarth
प्रचोदयात् - Inspire (or guide) us.
Each line of the mantra is repeated four times.
Swami Samarth is known for his teachings on spirituality, self-realization, and the importance of serving others. He is also known for his miraculous powers and ability to help his devotees overcome various obstacles and challenges in their lives.
Swami Samarth is believed to have taken samadhi, a state of deep meditation and spiritual consciousness, in the year 1878. His followers continue to venerate him to this day and consider him to be a great source of inspiration and guidance in their spiritual journeys.
Shri Swami Samarth Gayatri Mantra - 108 Times | श्री स्वामी समर्थ गायत्री मंत्र | Rajshri Soul
ॐ परमहंसाय विद्महे... इस मंत्र की धुन सुनते ही मन में एक गहरी शांति उतर आती है। जैसे कोई पुराना साथी धीरे से कह रहा हो—बस ध्यान करो, मैं हूँ ना। स्वामी जी का रूप परमहंस जैसा है, पूरी तरह शुद्ध और ज्ञान से भरा हुआ। योगियों के राजा के रूप में वो हमें याद दिलाते हैं कि असली योग बाहर की आसनों में नहीं, बल्कि मन की एकाग्रता में है। जब हम रोज़ की भागदौड़ में उलझ जाते हैं, तब यह मंत्र हमें खींचकर लाता है उस जगह पर जहाँ सब कुछ साफ़ दिखने लगता है। स्वामी जी की कृपा से बुद्धि जागृत होती है, रास्ते खुद-ब-खुद खुलने लगते हैं।
जीवन में जब मुश्किलें घेर लेती हैं, तब उनकी याद से दिल को ताकत मिलती है। वो दत्तात्रेय जी के अवतार माने जाते हैं, ब्रह्मा-विष्णु-महेश का मिला-जुला रूप। उनकी कृपा से साधक का मन पिघलता है, अहंकार छूटता है और सेवा का भाव जागता है। जैसे कोई माँ-बाप बच्चे को सिखाता है कि बस मेरे ऊपर छोड़ दे, मैं संभाल लूँगा। यही प्रेरणा है कि हम भी रोज़ थोड़ा-थोड़ा ध्यान करें, थोड़ा-थोड़ा दूसरों की मदद करें। स्वामी जी की इनायत से जीवन का हर बोझ हल्का हो जाता है, और मन में एक अजीब-सा सुकून बस जाता है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।
जय श्री स्वामी समर्थ जी की।
Language : Sanskrit
Lyrics : Traditional
Composer : Traditional
Artist : Susmirata Dawalkar
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