हरि नाम बड़ा अनमोल मोल भजन
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल भजन Hari Naam Bada Anmol Bhajan
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
उसे अपना बना ले, तू उसका हो जा।
भक्ति की चादर, फिर ओढ़ सो जा॥
बन जावें बिगड़े काम-काम,
तुझे खूब मिले आराम-राम॥
श्री बांके बिहारी, श्री बांके बिहारी,
नाम-नाम।
पावन ये प्यारे बोल-बोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
व्रज की गलियों में, इस भाव के संग जा।
मेरे बांके बिहारी, के रंग में रंग जा॥
करता है अब क्यों देर-देर,
रट नाम जुबां से बेर-बेर॥
अब मन का मन फेर-फेर,
वाणी में अमृत घोल-घोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
ये व्रज की माटी, है कितनी पावन।
मेरा मन वृंदावन, मेरा तन वृंदावन॥
करें पूजा-पाठ, महंत-संत।
भक्ति जीवन पर्यंत-अंत॥
कर संत समागम, संत-संत।
मन मंदिर के पट खोल-खोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
उसे अपना बना ले, तू उसका हो जा।
भक्ति की चादर, फिर ओढ़ सो जा॥
बन जावें बिगड़े काम-काम,
तुझे खूब मिले आराम-राम॥
श्री बांके बिहारी, श्री बांके बिहारी,
नाम-नाम।
पावन ये प्यारे बोल-बोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
व्रज की गलियों में, इस भाव के संग जा।
मेरे बांके बिहारी, के रंग में रंग जा॥
करता है अब क्यों देर-देर,
रट नाम जुबां से बेर-बेर॥
अब मन का मन फेर-फेर,
वाणी में अमृत घोल-घोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
ये व्रज की माटी, है कितनी पावन।
मेरा मन वृंदावन, मेरा तन वृंदावन॥
करें पूजा-पाठ, महंत-संत।
भक्ति जीवन पर्यंत-अंत॥
कर संत समागम, संत-संत।
मन मंदिर के पट खोल-खोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
उसे अपना बना ले, तू उसका हो जा।
भक्ति की चादर, फिर ओढ़ सो जा॥
बन जावें बिगड़े काम-काम,
तुझे खूब मिले आराम-राम॥
श्री बांके बिहारी, श्री बांके बिहारी,
नाम-नाम।
पावन ये प्यारे बोल-बोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
व्रज की गलियों में, इस भाव के संग जा।
मेरे बांके बिहारी, के रंग में रंग जा॥
करता है अब क्यों देर-देर,
रट नाम जुबां से बेर-बेर॥
अब मन का मन फेर-फेर,
वाणी में अमृत घोल-घोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
ये व्रज की माटी, है कितनी पावन।
मेरा मन वृंदावन, मेरा तन वृंदावन॥
करें पूजा-पाठ, महंत-संत।
भक्ति जीवन पर्यंत-अंत॥
कर संत समागम, संत-संत।
मन मंदिर के पट खोल-खोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
उसे अपना बना ले, तू उसका हो जा।
भक्ति की चादर, फिर ओढ़ सो जा॥
बन जावें बिगड़े काम-काम,
तुझे खूब मिले आराम-राम॥
श्री बांके बिहारी, श्री बांके बिहारी,
नाम-नाम।
पावन ये प्यारे बोल-बोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
व्रज की गलियों में, इस भाव के संग जा।
मेरे बांके बिहारी, के रंग में रंग जा॥
करता है अब क्यों देर-देर,
रट नाम जुबां से बेर-बेर॥
अब मन का मन फेर-फेर,
वाणी में अमृत घोल-घोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
ये व्रज की माटी, है कितनी पावन।
मेरा मन वृंदावन, मेरा तन वृंदावन॥
करें पूजा-पाठ, महंत-संत।
भक्ति जीवन पर्यंत-अंत॥
कर संत समागम, संत-संत।
मन मंदिर के पट खोल-खोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल,
हरि नाम बड़ा अनमोल मोल॥
हरि नाम बड़ा अनमोल,, बहुत ही प्यारा भजन,, सभी भक्त झूम उठे। Mukul dwivedi ji #mukuldwivedi #trending
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हरि के नाम की मिठास ऐसी है कि जीवन के हर कांटे फूल बन जाते हैं; जब यह नाम जीभ से उतरकर हृदय में उतरता है तो भीतर की बेचैनी शांत हो जाती है और संसारिक उलझनें ढीली पड़ने लगती हैं। नाम का सागर हर टूटे भरोसे को जोड़ देता है, बिगड़े कर्मों में सुधर की हवा बहती है और थके मन को गहरी आराम की छाँव मिलती है। वृन्दावन की पावन मिट्टी और बांके बिहारी की छवि में रंग जाने से आत्मा को एक नर्म, दिव्य मिलन सा अनुभव होता है; वाणी में उभरता हर शब्द अमृत की तरह उतरता है और जुबा पर नाम की लय हर क्षण को पूजनीय बना देती है। साध-संग और भक्ति के मिलन से मन का मंदिर खुलता है और जीवन की साधना अंत तक चलती रहती है; यही नाम का अनमोल मोल है जो साधक को सहज मुक्त कर देता है।
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Author - Saroj Jangir
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