है स्वर्ग से भी सुन्दर दरबार तेरा मैया भजन

है स्वर्ग से भी सुन्दर दरबार तेरा मैया भजन

(मुखड़ा)
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया,
भक्तों के मन को मोहे,
भक्तों के मन को मोहे,
दरबार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

(अंतरा)
तेरी राहें लग रही हैं,
जैसे हों माँ की बाँहें,
इन्हीं बाजुओं में भरकर,
बच्चों को माँ बुलाए,
भक्तों को मिल रहा है,
भक्तों को मिल रहा है,
यहाँ प्यार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

कहीं पर्वतों के ऊपर,
हैं बादलों के डेरे,
रंगीन कर दी घाटी,
यूं फूल हैं बिखेरे,
हर्ष में मिल रहा है,
हर्ष में मिल रहा है,
दीदार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

कूकें कहीं पे कोयल,
कहीं मोर बोलते हैं,
झरनों के गीत मन में,
अमृत सा घोलते हैं,
है स्वप्न से भी प्यारा,
है स्वप्न से भी प्यारा,
संसार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

टोले बनाके आते,
तेरे भक्त प्यारे-प्यारे,
भक्तों के द्वारा तेरे,
माँ गूंजते जयकारे,
हर एक ज़ुबाँ बोले,
हर एक ज़ुबाँ बोले,
जयकारा तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

तेरे दर को छोड़कर माँ,
कहीं और ना रहूँगा,
चरणों में तेरे मैया,
जीवन गुज़ार दूंगा,
जीवन पे ‘अमर’ के हैं,
जीवन पे ‘अमर’ के हैं,
उपकार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।

(पुनरावृत्ति)
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया,
भक्तों के मन को मोहे,
भक्तों के मन को मोहे,
दरबार तेरा मैया,
है स्वर्ग से भी सुंदर,
दरबार तेरा मैया।।



शुक्रवार सुबह मातारानी का सुन्दर भजन ||है स्वर्ग से भी सुन्दर दरबार तेरा मइया ||Hai Swarg Se Sunder
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