चलो चलिये दरबार माँ दी चिठ्ठी आई भजन
चलो चलिये दरबार माँ दी चिठ्ठी आई भजन
चलो चलिये चलो चलिये,चलो चलिये दरबार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये,
खुल गए ने खुल गए ने,
खुल गए ने वैष्णों दे द्वार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये,
चलो चलिये चलो चलिये,
चलो चलिये दरबार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये।
ऊँचीया चढ़ाईयां चढ़,
संगता ने आंदीयां,
संगता ने आंदीयां,
संगता ने आंदीयां,
तेरे कन्ने दिल आले,
दुखड़े सुनांदीया,
दुखड़े सुनांदीया,
दुखड़े सुनांदीया,
सुन देवीए,
तुहियो मेरा चैन ते करार,
माँ दी चिठ्ठी आई ऐ,
चलो चलिये चलो चलिये,
चलो चलिये दरबार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये।
जग है पराया,
किसे नहियो पूछेया,
किसे नहियो पूछेया,
किसे नहियो पूछेया,
अपने बच्चे कन्ने,
कदे नी माँ रुसेया,
कदे नी माँ रुसेया,
कदे नी माँ रुसेया,
आ अम्बे आ देवीए,
होई शेर सवार,
माँ दी चिठ्ठी आई ऐ,
चलो चलिये चलो चलिये,
चलो चलिये दरबार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये।
गुफा च बैठी माँ
काली रूप धारी ऐ,
काली रूप धारी ऐ,
काली रूप धारी ऐ,
अंग संग शारदा ते,
लक्ष्मी बाली ऐ,
लक्ष्मी बाली ऐ,
लक्ष्मी बाली ऐ,
खुशी वंडनी झोली भरनी,
भगते करै मालामाल,
माँ दी चिठ्ठी आई ऐ,
चलो चलिये चलो चलिये,
चलो चलिये दरबार,
माँ दी चिठ्ठी आई ये।
Maa vaishno bhajan - Chalo chaliye darbar maa di chithi aayi hai
माँ के दरबार की पुकार सुनते ही दिल में एक अजीब-सी उमंग भर आती है। जैसे कोई पुरानी चिट्ठी हाथ लग गई हो, जिसमें माँ ने खुद लिखा है—आ जा बेटा, तेरे दुख मैं सुनूँगी, तेरे चैन मैं दूँगी। दुनिया पराई लगती है, कोई नहीं पूछता, लेकिन माँ कभी रूठती नहीं। वो शेर पर सवार होकर आती हैं, काली रूप में बैठी हैं गुफा में, फिर भी साथ में शारदा और लक्ष्मी जी की कृपा बिखेरे रहती हैं। ऊँची चढ़ाइयाँ चढ़ते हुए पैर थक जाते हैं, लेकिन साथ चलने वाली संतों की याद से दिल मजबूत हो जाता है। दुख सुनाने को बस एक पुकार काफी है, और माँ झोली भर-भरकर खुशियाँ बाँट देती हैं, भक्तों को मालामाल कर देती हैं।
जीवन की ठोकरों से जब मन उदास हो जाता है, तब याद आता है कि माँ का दरबार हमेशा खुला है। वो तीन रूपों में विराजमान हैं—शक्ति देने वाली, समृद्धि बरसाने वाली और ज्ञान की ज्योति जलाने वाली। गुफा में बैठी वो काली रूप धारण करती हैं, लेकिन अंदर से करुणा और प्रेम की धारा बहती रहती है। जैसे कोई माँ अपने बच्चे को गोद में उठाकर कहती है—डर मत, सब ठीक हो जाएगा। यही पुकार है कि चलो चलिए, दरबार में शीश झुकाइए, क्योंकि माँ की एक नजर से सारे दुख दूर हो जाते हैं, जीवन में सुकून और खुशी लौट आती है। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे।
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