जब कोई नहीं आता मेरी मैया आती भजन

जब कोई नहीं आता मेरी मैया आती भजन

जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है।

मेरी नैया चलती है,
पतवार नहीं चलती,
मैया तेरे बिना मुझे,
तकरार आती है,
मेरा काम पड़े जब भी,
माँ दौड़ी आती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है।

दुख में जो याद करे,
दुख हल्का हो जाये,
जो माँ से प्यार करे,
माँ उसकी हो जाये,
बिन बोले दुखो को,
माँ पहचान जाती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है।

इतनी बड़ी होकर भी,
दुखियों से प्यार करे,
चाहे छोटा हो या बड़ा,
सबको स्वीकार करे,
अपने भक्तो का कहना,
माँ मान जाती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है।

आओ सब मिलकर के,
मैया को याद करे,
मैया को याद करें,
दिल से फरियाद करे,
अपने भक्तों के दिल भी,
माँ जान जाती है,
मेरे दुख के दिनों में वो,
बड़ा काम आती है,
जब कोई नहीं आता,
मेरी मैया आती है।

Jab Koi Nahi Aata Meri Maiya Aati Hai || जब कोई नहीं आता मेरी मैया आती है || By - Shailendra Ji

शक्तिवाद परंपरा में हिंदू धर्म की देवी सर्वोच्च सत्ता हैं, जबकि स्मार्त परंपरा में वे ईश्वर के पाँच प्रमुख रूपों में से एक हैं। शैववाद और वैष्णववाद जैसी अन्य हिंदू परंपराओं में देवी पुरुष देवताओं (पुरुषों) की सक्रिय ऊर्जा और शक्ति का प्रतीक हैं—जैसे वैष्णववाद में विष्णु की शक्ति लक्ष्मी तथा शैववाद में शिव की शक्ति पार्वती। यह दृष्टिकोण देवी को सृष्टि की गतिशीलता का आधार बनाता है, जहाँ पुरुष स्थिर सत्ता होते हैं और स्त्री ऊर्जा उनकी क्रियाशीलता प्रदान करती है।

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