बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे साँवरिया भजन
बंसी बाजे रे मधुबन में अमृत बरसे साँवरिया भजन
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया,
अमृत बरसे साँवरिया, दर्शन दे जा साँवरिया।।
सास-ससुर मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
जेठ-जेठानी मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
देवर-देवरानी मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
ननद-नंदोई मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
अमृत बरसे साँवरिया, दर्शन दे जा साँवरिया।।
सास-ससुर मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
जेठ-जेठानी मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
देवर-देवरानी मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
ननद-नंदोई मेरे गए वृन्दावन, ले डलिया में फूल,
ऐसो आयो हवा का झोंका, कहीं कलियाँ, कहीं फूल,
बंसी बाजे रे मधुबन में, अमृत बरसे साँवरिया।।
BANSI BAJ RAHI MADHUBAN ME AMRIT BARSE SANWARIYA
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SINGER : SUMAN SHARMA
श्रीकृष्ण की मधुर बाँसुरी का स्वर हृदय को ऐसी अलौकिक अनुभूति से भर देता है कि मन स्वतः ही संसार की चिंताओं से दूर होकर भक्ति में डूब जाता है। वृंदावन की पावन भूमि, पुष्पों की सुगंध और प्रभु की मनमोहक छवि का स्मरण होते ही आत्मा आनंद के अमृत से सराबोर हो उठती है। मन में केवल एक ही अभिलाषा रहती है कि जीवन का प्रत्येक क्षण उनके दर्शन, नाम-स्मरण और प्रेममय सान्निध्य में बीते। उनके दिव्य स्वरूप का ध्यान मन को कोमल, निर्मल और प्रेम से परिपूर्ण बना देता है। परिवार, समाज और समस्त संसार का वास्तविक सुख भी तभी सार्थक लगता है, जब उसमें प्रभु की भक्ति का मधुर रस समाया हो। उनकी बाँसुरी की तान केवल संगीत नहीं, बल्कि आत्मा को प्रभु से जोड़ने वाला दिव्य संदेश है। जो हृदय प्रेम और श्रद्धा से उन्हें पुकारता है, वह उनके स्नेह, करुणा और कृपा का अनुभव अवश्य करता है। यही दिव्य प्रेम जीवन को आनंद, शांति और भक्ति के अमृत से भर देता है। जय श्री राधे कृष्ण!
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Author - Saroj Jangir
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