म्हारी सोवनी चिड़ी म्हारी रुपा री चिड़ी
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी,
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
नौ दस मास गरब में रही,
तु नरगा री घुरी,
बाहर आय राम न भुलो,
राम री पुरी,
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
नो दस मास घड़ता लागा,
हद सु हद घड़ी,
रु रु जोड़ा तील तील सादा,
तारा बीच जड़ी,
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
पाणी पिलाऊ चुगो चुगाऊ,
राखू हरी भरी,
ऐ चीड़कली पल पल मैं,
थारी खबरा ले हूं,
जाने कू बिसरी,
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी,
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
गुरु रे परताप सु,
सीरला जल सु तीरी,
रामानंद रा भणे कबीरा,
सत सग मे सुदरी,
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
म्हारी सोवनी चिड़ी,
म्हारी रुपा री चिड़ी
काया रो कारीगर,
तने फुटरी घड़ी।
सोवनी चीडी़ मन मोहवनी चीडी़ || काया रा कारीगर थाने फुटरी घडी़ || राजस्थानी भजन || shobhamali
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