तू दयाल दीन हो तू दानी हो भिखारी भजन

तू दयाल दीन हो तू दानी हो भिखारी

तू दयाल दीन हो,
तू दानी हो भिखारी,
हो प्रसिद्ध पातकी,
तू पाप पुंज हारी।

नाथ तू अनाथ को,
अनाथ कौन मोसो,
मो सामान आरत नाही,
आरती हर तोसो।

ब्रह्मा तू जीव हो,
तू ठाकुर हो चेरो,
तात मात गुरु सखा,
तू सब विधि ही मेरो।

तोही मोहि नाते अनेक,
मानिए जो भावे,
ज्यो त्यों तुलसी कृपालु,
चरण शरण पावे।


Tu Dayal Deen - Tulsidas Bhajan

This is a bhajan (Hindu devotional song), called "Tu Dayal Deen". It is written by the 16th century saint Tulsidas. It is sung by Chandrakantha Courtney. 

दया और दान का रूप एक ऐसा सान्निध्य है जो हर टूटे हुए मन को थाम लेता है। जो हाथ देने वाला है, वही ग़रीबों का सहारा बनता है और पाप-पिंडों से मुक्त कराने का मार्ग खोलता है। निराश लोगों के लिए एक आश्रय बनकर खड़ा होना, उनके अंदर नयी उम्मीद जगाना और उन्हें जीवन की राह दिखाना यही उस उपस्थिति की पहचान है। जब जीवन कठिनाइयों से भर जाता है, तब वह साथ होकर अँधेरों को रोशनी में बदल देता है; हर छोटे से छोटे मिलने वाले सहारे में उसकी उदारता और करुणा झलकती है। 

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