हेली म्हारी मंदिर में काई डोले भजन

हेली म्हारी मंदिर में काई डोले भजन

हेली म्हारी मंदिर में काई डोले,
हेली म्हारी मस्जिद में काई डोले,
थारी काया में बसे करतार।

मुरतकोर मंदिर में मेली वा मुखड़े नही बोले
वाका दीवान तो दरवाजे ठाडा, बिना हुकम कुण खोले।

राम नाम की या बालग उतरी बिन गाहक कुण खोले,
मूरख ने काई ज्ञान बतावा राई परवत का ओले

गढ़ पर्वत से गंगा निकली मैली काया धोईले,
बिन साबुन से मेल कटे री, मल-मल काया धोइले

जोहरी बाजार लग्यो घट भीतर, मन/दिल चाहे सो लईले
हीरा तो जोहरी ने बिण लिया, मूरख काँकरा तोले/बिणे।

नाथ गुलाब मिल्या गुरु पुरा दिल की घुंडी खोले
सब जीवों पर कृपा कीन्ही, धर-धर कांटे तोले।

हेली म्हारी मंदिर में काई डोले
हेली म्हारी मस्जिद में काई डोले
थारी काया में बसे करतार।


हेली म्हारी मंदिर में कई डोले | Heli mhari mandir mein kai dole | Geeta Parag 

Lyrics by Nath Gulab/ गीत के शब्द : नाथ गुलाब 
Composition : Geeta Parag 

Main Vocal : Geeta Parag 
Choras&Harmonium : Tanu Parag
Khartal : Talab Khan
Dholak : Ajay Tipaniya
Manjira : Mayank Tipaniya
Sarangi : Kasam Khan
Audio and Video : Agami 

मंदिर-मस्जिद में झूलती हैं वो, काया में बसे करतार हैं। मूर्ति कोर मंदिर में मुखड़ा न बोले, दीवान दरवाजा ठाड़ा बिना हुकम न खोले। राम नाम की बालग उतरी बिन गाहक के, मूरख ज्ञान बतावे राई-पर्वत का ओला। इश्वर का आशीर्वाद मैली काया धो देता है।

गढ़ पर्वत से गंगा निकली मल-मल धोईले, बिन साबुन मेल कटे। जोहरी बाजार लगे घट में, मन चाहे सो ले ले, हीरा जोहरी ने बिन लिया मूरख कंकरा तोले। नाथ गुलाब मिला गुरु ने दिल की घुंडी खोली, सब जीवों पर कृपा की, धर-धर कांटे तोले। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री करतार जी की। 

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