झाड़ू म्हारो फिर रयो निर्गुण माय Saroj Jangir झाड़ू म्हारो फिर रयो निर्गुण मायसाखी:-जो तू सांचा बाणिया सांची हाट लगावअंदर झाडू देयके कचरा देत बहाव।।भजन:- हाँ रे मनवा सत सरभंगी म्हारो चतुर सुजानझाडू म्हारो फिरी रयो निर्गुण माय हाँ रे भाई।।यो झाड़ू म्हारो अटल अखाडा रा माय हाँ रे भाई मन पवन का झाडू बनाया, करनी रा कसणा लगायागुरु गम बंगड़ी लगी झाडू में, इणा मन की मुक्ति जाण।। New Bhajan 2023 नाभी द्वादस चढ़ कर देख्यो, देख्यो घणो मैदानबंक नाल से चढ्यो सरभंगी, झाड्यो दसमों द्वार।।अलियां गालियाँ शहर मंजारा, फिरी रही सुरता नार, हां रे भाईकर कर चौकस झाड्यो मैदान, यां पवन करेगा पहचान।। करम भरम का झाड्या कसौटा जग में दिया हंसा रालनेमी नगर मात्रमजी को झाडू, कोई संत करेगा पहचान || झाड़ू म्हारो फिर रयो निर्गुण माय | Jhadu Mharo Phir Rayo Nirgun Maay | Geeta Parag