बीरो सा आया भरण ने मायरो भजन
बीरो सा आया भरण ने मायरो भजन
बीरो सा आया भरण ने मायरो,
मायरो, मायरो,
सुनकर म्हारे मन की,
करुण पुकार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
ओ म्हारी नानी बाई को,
आया मायरो,
मायरो मायरो,
ओ म्हारो सांवल भायो,
आया थारे द्वार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
बीरो सा छप्पन करोड़ को,
लाया मायरो,
मायरो मायरो,
ओ ल्याया ल्याया रे,
माया अपरम्पार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
बीरो सा आया भरण ने मायरो,
मायरो, मायरो,
सुनकर म्हारे मन की,
करुण पुकार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
मायरो, मायरो,
सुनकर म्हारे मन की,
करुण पुकार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
ओ म्हारी नानी बाई को,
आया मायरो,
मायरो मायरो,
ओ म्हारो सांवल भायो,
आया थारे द्वार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
बीरो सा छप्पन करोड़ को,
लाया मायरो,
मायरो मायरो,
ओ ल्याया ल्याया रे,
माया अपरम्पार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
बीरो सा आया भरण ने मायरो,
मायरो, मायरो,
सुनकर म्हारे मन की,
करुण पुकार बीरो सा,
आया भरण ने मायरो।
बीरो सा आया भरण ने मायरो || नानी बाई को मायरो भजन By Triveni Swari || त्रिवेणी स्वरी जी ||
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नरसी जी की बेटी, नानी बाई का मायरा, भक्त और भगवान के अटूट प्रेम की गाथा है। जब नानी बाई के ससुराल वालों ने निर्धन नरसी जी का उपहास करने के लिए मायरे (भात) में धन दौलत की मांग करते हैं, तब नरसी जी के पास केवल अपनी अटूट श्रद्धा और भगवान श्री कृष्ण का नाम था। अपनी बेटी की लाज बचाने के लिए जब नरसी जी खाली हाथ पहुँचे, तो स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने 'साँवरिया सेठ' बनकर अद्भुत चमत्कार किया। उन्होंने सोने-चाँदी और बेशुमार धन-दौलत से नानी बाई का मायरा भरकर न केवल अपने भक्त की लाज रखी।
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Author - Saroj Jangir
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