युग जीवे मेरे सतगुर प्यारे तू भजन

युग जीवे मेरे सतगुर प्यारे तू भजन

युग जीवे मेरे सतगुर प्यारे तू,
हर हाल विच मेरे काज सवारे तू।

गुण अवगुण मेरे कदी भी न परखे,
लाज हमेशा रखी जावा तेरे सदके,
रेहमता दी दिति दाता सदा ही सहारे तू,
हर हाल विच मेरे काज सवारे तू।

सुख विच दुःख विच अंग संग रहा तू,
सारे छड़ गये तावी छड़ के न गया तू,
मित्र प्यारेया दे सोहने रूपधारे तू,
हर हाल विच मेरे काज सवारे तू।

टूटे हुए तारियाँ नु शन तू बनाना है,
सब कुछ जान के भी भोला बन जाना है,
लखा डूब जान जो की लाये ने किनारे तू,
हर हाल विच मेरे काज सवारे तू।

दासन दास तेरी महिमा नू गाये,
तेरी सोणी महिमा नू सब नू सुना ए,
अपने चरणा कोल सदा रखना तू ही तू,
हर हाल विच मेरे काज सवारे तू।



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