जिस के सिर ऊपर तू स्वामी

जिस के सिर ऊपर तू स्वामी सो दुःख कैसा पावे

जिस के सिर ऊपर तू स्वामी, सो दुःख कैसा पावे,
बोल न जाने माया मधि, माता मरना चित न आवे।।
जिस के सिर ऊपर तू स्वामी...
सतनाम वाहेगुरु, सतनाम वाहेगुरु।।

मेरे राम राये, तू संता का, संत तेरे,
तेरे सेवक को भय किछु नाहीं, जम नहीं आवे नेड़े।।
जो तेरे रंगी राते स्वामी, तिनका जन्म-मरण दुःख नाशा,
तेरी बख्शिश न मिटे कोई, सतगुरु का दिलासा।।
जिस के सिर ऊपर तू स्वामी...
सतनाम वाहेगुरु, सतनाम वाहेगुरु।।

नाम ध्यानन, सुख फल पावन, आठ पहर आराधि,
तेरी शरण, तेरे भरोसे, पांच दुश्ट ले साधि।।
ज्ञान-ध्यान कछु कर्म न जाना, सार न जाना तेरी,
सबसे बड़ा सतगुरु नानक, जिनी कल राखी मेरी।।
जिस के सिर ऊपर तू स्वामी...
सतनाम वाहेगुरु, सतनाम वाहेगुरु।।


JIS KE SIR OOPER TOON SWAMI | BHAI SURINDER SINGH JODHPURI (HAZOORI RAGI DARBAR SAHIB AMRITSAR)
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