मन मंदिर में बसा रखी है गुरु तस्वीर सलोनी भजन

मन मंदिर में बसा रखी है गुरु तस्वीर सलोनी भजन


मन मंदिर में बसा रखी है,
गुरु तस्वीर सलोनी,
रोम रोम में बसे हैं गुरुवर,
विद्या सागर मुनिवर।

गुरुवर विद्या सागर जी हैं,
करुणा की गागर जी,
चर्या आपकी आगम रूप,
दिखते हो अरिहंत स्वरूप,
दर्शन जो भी पाता है,
गुरुवर का हो जाता है।

दिव्य आप का दर्शन है,
भव्य आपका चिंतन है,
प्रवचन देते आध्यात्मिक,
और कभी सम सामायिक,
हाथ में पिछी कमंडल है,
और पीछे भक्त मंडल है।

मृदु आपकी वाणी है,
मुख से बहे जिनवाणी है,
सरल गुरु कहलाते हो,
खूब आशीष लुटाते हो,
तुम गुरुदेव हमारे हो,
हम भक्तों को प्यारे हो।

मन मंदिर में बसा रखी है,
गुरु तस्वीर सलोनी,
रोम रोम में बसे हैं गुरुवर,
विद्या सागर मुनिवर।



Jain Guru Bhajan Man Mandir Me Basa Rakhi He आचार्य श्री विशुद्धसागरजी

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Singer and Lyrics : Dinesh Jain Advocate
Recording : Digidreams Studio Indore
Editing : Hirdesh Singh Sikarwar
मार्गदर्शन : श्री राजेश दुबे रज्जू
विशेष सहयोग : 
श्री गौरव जैन उज्जैन
श्री मनीष जैन मोना
श्री लघुनंदन जैन
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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