भगती रा मार्ग और है राजस्थानी भजन

भगती रा मार्ग और है राजस्थानी भजन

भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लागी चोट कालजे करके।।

गोपीचंद जोगी हो गयो जी,
ले लियो भगवा भाणा,
गुरु जाणे भेजिया महल में,
डोड़्या पे अलख जगाणा,
भोजन छत्तीसों त्याग के भी,
शाखे फल तू खाणा,
तब शोर मचा रणमास में रे,
तब शोर मचा रणमास में रे,
देख्यो नहीं पीछे मुड़के रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

वन~बीज भरतरी भूप में,
जब मार्यो एक निशाणा,
सज गयो मौका जोग रो,
वो रखग्यो हो गयो आणा,
तू मृत्यु~मृग ने जिंदा करजो,
नाहीं तो धरजो भगवा भाणा,
जब कियो सर्जींवन मृग रो,
जब कियो सर्जींवन मृग रो,
गुरु कीनी किरपा करके रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

सुल्तान मगन वैराग में,
तज दीनो बल्ख~बुखारा,
जो रथ~पालकी चालतो,
पावां में पड़ ग्यो छाला,
ज्यांरे पाँच टका पोशाक री,
वो ओढ़्यो गुदड़ भारा,
वो पड़ा रह्यो उजाड में,
वो पड़ा रह्यो उजाड में,
नाहीं खायो उदर भरके रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

विष भर~भर प्याला भेजिया,
वो पी गई मीरा बाई,
सूली पर सेज बिछाई के,
साँपां री माला पहनाई,
गिरिधर ले तन हरि सँवरो,
मीरा के महला माई,
जब राणो दौड़्यो मारण ने,
जब राणो दौड़्यो मारण ने,
हाथां में खांडो खड़के रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

कुएँ में शेख फरीद ने,
जब बोली मीठी भाषा,
कौआ तू सब तन खावजो,
म्हारे हाडां ऊपर माँसा,
तू दो नैणां मती खावजो,
म्हाने राम~मिलण री आशा,
ऊँधो लटकायो उपमे में,
ऊँधो लटकायो उपमे में,
वो होयो आसरो हरि के रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

बाजीद कहे गुरु ऊँट कोरे,
लोग कहे सब मुवा,
नथूं कछु बिगड़्यो नाहीं,
बाजीद ने अचरज हुआ,
उड़ण वाली चीजां उड़ गईं,
उड़ गयो सैलाणी सुआ,
वो करी तपस्या जोर री,
वो करी तपस्या जोर री,
मौत~काल सूँ डरके रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

पीपाजी जल में कूद गयो,
देखो कैसी करी दृढ़ताई,
नर~तन रो पालो जीत्यो,
मृत्यु री बाजी लगाई,
बखणा बंधु तू चेत जा,
दिन~दिन तेरी कविताई,
दिन बिन चेत्या भूंडी होवसी,
दिन बिन चेत्या भूंडी होवसी,
जीवन में सुफलत कर ले रे,
भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके।।

भगती रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लगणी रा मार्ग और है,
लागी चोट कालजे करके,
लागी चोट कालजे करके।।



!! भक्ति रा मार्ग और है लगी काळंजिया में चोट !! #बावजीरामनिवासराव #भजन

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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