रट स्वास स्वास में राम भजन करले रे पंछी

रट स्वास स्वास में राम भजन करले रे पंछी

रट स्वास स्वास में राम,
भजन करले रे पंछी,
रह जायेगी पूंजी ठाम,
चलेगी छोड़ सभी धन धाम,
भजन करले रे पंछी।।

जानबूझकर क्या भूला है,
कौन किसी का न्याती,
जीव जगत में सदा अमर है,
कर्म बनेगी साथी रे,
ये मित्र त्रिया संतान,
अंत में आये ना कोई काम,
भजन करले रे पंछी।।

घणी रीत समझाऊं रे जिवड़ा,
सोच समज मन मांही,
काल फांस जद कण्ठ पड़ेगी,
कौन छुड़ाने आई रे,
फिर पछतायेगा मान,
अरे जद जम पाड़ेगा चाम,
भजन करले रे पंछी।।

सपना ज्यों संसार बावरा,
फूल रहा जीवन में,
थारी मारी करता,
जाय रियो खीवन में,
अब करके ‘भैरव’ ध्यान,
बसाले मन मंदिर में राम,
भजन करले रे पंछी।।

रट स्वास स्वास में राम,
भजन करले रे पंछी,
रह जायेगी पूंजी ठाम,
चलेगी छोड़ सभी धन धाम,
भजन करले रे पंछी।।



रट स्वास स्वास में राम भजन करले रे पंछी बद्री लाल जी गाडरी के स्वर में भैरव शंकर जी की प्रसिद्ध रचना

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गायक बद्री लाल जी गाडरी
ढोलक आकास चन्देरिया 
पेड़ शांतिलाल लसाड़िया
साउंड चारभुजा जोरावरपुरा
सह गायक रामप्रसाद वैष्णव
आयोजन स्थल पिथास
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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