युग युग से हिन्दुत्व सुधा की लिरिक्स
युग युग से हिन्दुत्व सुधा की,
बरस रही मंगलमय धार,
भारत की हो जय जयकार,
भारत की हो जय जयकार।
भारत ने ही सारे जग को,
ज्ञान और विज्ञान दिया,
अनुपम स्नेह भरी दृष्टि से,
जन जन का उपकार किया,
जननी की पावन पूजा का,
सुखमय रूप हुआ साकार,
भारत की हो जय जयकार।
भारत अपने भव्य रूप को,
धरती पर फिर प्रकटाये,
नष्ट करे सारे भेदों को,
समरसता नित सरसाये,
पुण्य धरा के अमर पुत्र हम,
पहचाने निज शक्ति अपार,
भारत की हो जय जयकार।
भारत भक्ति हृदय में भरकर,
अनथक तप दिन रात करें,
शाखा रुपी नित्य साधना,
सुन्दर सुगठित रूप वरें,
निर्भय होकर बढ़ें निरंतर,
दृढ़ता से जीवन व्रत धार,
भारत की हो जय जयकार।
युग युग से हिन्दुत्व सुधा की,
बरस रही मंगलमय धार,
भारत की हो जय जयकार,
भारत की हो जय जयकार।
युग युग से हिंदुत्व सुधा की बरस रही मंगलमय धार। भारत की हो जय - जयकार।।