गुरुवर का हुआ उपकार बहुत अज्ञान तिमिर हरने

गुरुवर का हुआ उपकार बहुत अज्ञान तिमिर हरने


गुरुवर का हुआ उपकार बहुत,
अज्ञान तिमिर हरने के लिए,
मेरे मन को बनाया है गागर,
प्रभु ज्ञान सुधा भरने के लिए,
गुरुवर का हुआ उपकार बहुत।

तन को अपना था मान रहा,
पर द्रव्यों में सुख था जान रहा,
पाँचों पापों में लिप्त रहा,
शाश्वत सुख से अनजान रहा,
मिथ्यात्व का मेरे नाश किया,
सम्यक्त्व प्रकट करने के लिए,
गुरुवर का हुआ उपकार बहुत।

निज आत्मा स्वभाव में रम जाऊँ,
एक दिन तुमसा ही बन जाऊँ,
गुरुवर ऐसा वर दो मुझको,
भव भव तुमसा ही गुरु पाऊँ,
गुणगान सदा ही करता रहूँ,
भव-सागर~से तिरने के लिए,
गुरुवर का हुआ उपकार बहुत।

गुरुवर का हुआ उपकार बहुत,
अज्ञान तिमिर हरने के लिए,
मेरे मन को बनाया है गागर,
प्रभु ज्ञान सुधा भरने के लिए,
गुरुवर का हुआ उपकार बहुत।



गुरूवर का उपकार | Acharya Shri Vidyasagar Ji | Jain Bhajan | Jain Stavan | R Jain Melodies

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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