आज महफिल सजा बैठा हमे भी दर बुला बैठा भजन
आज महफिल सजा बैठा हमे भी दर बुला बैठा भजन
महफिल सजा बैठा,
आज महफिल सजा बैठा
हमें भी दर बुला बैठा
भजन सुनने का है शौकीन,
तुम्हें भी ये बुला बैठा।।
सांवरा तू दयालु है,
सांवरा तू कृपालु है।।
सांवरा तू दयालु है,
सांवरा तू कृपालु है।।
कभी सुनता हमारी है,
कभी सुनता तुम्हारी है
समझता मन की है तेरी,
बड़ा सुलझा खिलाड़ी है।।
सांवरा तू....
सुदामा तुम बनो पहले,
कन्हैया ये तुम्हारा है
बनो नरसिंह के जैसे तुम,
ये द्वारा सबसे प्यारा है।।
सांवरा तू....
सजा दो भाव भजनों से,
रिझाने हम भी आए हैं
कृपा स्वर कंठ में इसकी,
सुनाने हम भी आए हैं।।
सांवरा तू....
आज महफिल सजा बैठा,
हमें भी दर बुला बैठा
भजन सुनने का है शौकीन,
तुम्हें भी ये बुला बैठा।।
आज महफिल सजा बैठा
हमें भी दर बुला बैठा
भजन सुनने का है शौकीन,
तुम्हें भी ये बुला बैठा।।
सांवरा तू दयालु है,
सांवरा तू कृपालु है।।
सांवरा तू दयालु है,
सांवरा तू कृपालु है।।
कभी सुनता हमारी है,
कभी सुनता तुम्हारी है
समझता मन की है तेरी,
बड़ा सुलझा खिलाड़ी है।।
सांवरा तू....
सुदामा तुम बनो पहले,
कन्हैया ये तुम्हारा है
बनो नरसिंह के जैसे तुम,
ये द्वारा सबसे प्यारा है।।
सांवरा तू....
सजा दो भाव भजनों से,
रिझाने हम भी आए हैं
कृपा स्वर कंठ में इसकी,
सुनाने हम भी आए हैं।।
सांवरा तू....
आज महफिल सजा बैठा,
हमें भी दर बुला बैठा
भजन सुनने का है शौकीन,
तुम्हें भी ये बुला बैठा।।
MUJHE BETA KEH KE BULANA PADEGA | मुझे बेटा कहके बुलाना पड़ेगा Rajni Rajasthani latest shyam bhajan
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भव का विस्तार सीधे प्रस्तुत किया जा रहा है — किसी तीसरे‑व्यक्ति का जिक्र या “गीत में कहा गया” जैसी टिप्पणी नहीं की जा रही है।
महफिल में बैठने का भाव एक आंतरिक बुलावा और साझी श्रद्धा का संकेत है। वहां पहुँचकर मन एकाग्र, प्रसन्न और उम्मीद से भरा होता है; भजन‑रागों की धुनें जैसे भीतर की खिड़कियाँ खोल देती हैं और आत्मा संगीत की लहरों में बह जाती है। गीतों में पाई जाने वाली दयालुता और कृपा की झलक सुनने वाले के हृदय को नम करती है और एक सहज विश्वास जगाती है कि इस महफिल में शांति, प्रेम और संरक्षण मिलेगा।
संबोधित स्वर की समझदारी और सूक्ष्मता यह दर्शाती है कि वह हृदय के भावों को पढ़ लेता है — कभी अपनी पीड़ा कभी दूसरों की व्यथा वह समेट लेता है। ऐसे सहृदय और निपुण व्यक्तित्व के साथ होने पर आत्मा को एक भरोसा मिलता है कि कठिनाइयों का हल संभव है; उसकी उपस्थिति संकटों को हल्का कर देती है और मनोबल बढ़ाती है।
महफिल में बैठने का भाव एक आंतरिक बुलावा और साझी श्रद्धा का संकेत है। वहां पहुँचकर मन एकाग्र, प्रसन्न और उम्मीद से भरा होता है; भजन‑रागों की धुनें जैसे भीतर की खिड़कियाँ खोल देती हैं और आत्मा संगीत की लहरों में बह जाती है। गीतों में पाई जाने वाली दयालुता और कृपा की झलक सुनने वाले के हृदय को नम करती है और एक सहज विश्वास जगाती है कि इस महफिल में शांति, प्रेम और संरक्षण मिलेगा।
संबोधित स्वर की समझदारी और सूक्ष्मता यह दर्शाती है कि वह हृदय के भावों को पढ़ लेता है — कभी अपनी पीड़ा कभी दूसरों की व्यथा वह समेट लेता है। ऐसे सहृदय और निपुण व्यक्तित्व के साथ होने पर आत्मा को एक भरोसा मिलता है कि कठिनाइयों का हल संभव है; उसकी उपस्थिति संकटों को हल्का कर देती है और मनोबल बढ़ाती है।
Singer:- Rajni Rajasthani (9314297207)
Music:- Ashish Dadhich
Lyrics:- Aaditya modi (sonu)
Video/Dop:- Sumirau Shyam Sumirau Vikash Saini 9839175817
Producer:- Tarun Sharma
Music:- Ashish Dadhich
Lyrics:- Aaditya modi (sonu)
Video/Dop:- Sumirau Shyam Sumirau Vikash Saini 9839175817
Producer:- Tarun Sharma
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Author - Saroj Jangir
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