ना राग रहे ना द्वेष रहे जैन भजन
ना राग रहे ना द्वेष रहे जैन भजन
ना राग रहे ना द्वेष रहे,
ना शिकवे हो ना शिकायत हो,
मन गंगा सा पावन हो,
खुशियों का खिलता सावन हो।
कषायों की मंदता हो,
मैत्री का बहता झरना हो,
स्नेह सलिल बरसता हो,
जीवन चंदन सा महकता हो।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
जब तक हैं रगड़े और झगड़े,
पावन पथ पर नहीं चलते है,
पूण्य का खोते अवसर है,
मर मर के जीव जीते है।
क्षमा जब तक करते नहीं हम,
वैर भाव रहता हरदम,
जीवन में रहती कटुता है,
और चित्त कहीं नहीं लगता है।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
एक दूजे को माफ करो,
मन में ना सन्ताप रखो,
सच्चे मन से मिच्छामि,
दुक्कड़म का तुम तो आव्हान करो।
वैभव संगी विनंती करे,
क्षमा का नव गान करें,
जाने अनजाने हुई हो भूल,
तो माफी का संज्ञान करें।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
ना शिकवे हो ना शिकायत हो,
मन गंगा सा पावन हो,
खुशियों का खिलता सावन हो।
कषायों की मंदता हो,
मैत्री का बहता झरना हो,
स्नेह सलिल बरसता हो,
जीवन चंदन सा महकता हो।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
जब तक हैं रगड़े और झगड़े,
पावन पथ पर नहीं चलते है,
पूण्य का खोते अवसर है,
मर मर के जीव जीते है।
क्षमा जब तक करते नहीं हम,
वैर भाव रहता हरदम,
जीवन में रहती कटुता है,
और चित्त कहीं नहीं लगता है।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
एक दूजे को माफ करो,
मन में ना सन्ताप रखो,
सच्चे मन से मिच्छामि,
दुक्कड़म का तुम तो आव्हान करो।
वैभव संगी विनंती करे,
क्षमा का नव गान करें,
जाने अनजाने हुई हो भूल,
तो माफी का संज्ञान करें।
क्षमा वीरों का आभूषण,
ना कायर का कोई भूषण,
कर दो और दे दो क्षमा तुम।
क्षमा वीरो का आभूषण !! “Michhami Dukkadam 2021!! उत्तम क्षमा !! Vaibhav Soni
आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए क्षमा के परम महत्व को स्थापित करता है, भक्त कामना करता है कि उसके मन में न कोई राग बचे, न द्वेष, न किसी से कोई शिकायत या शिकवा। कवि हृदय से इच्छा करता है कि मन गंगा के जल जैसा पावन हो जाए और कषायों (क्रोध, मान, माया, लोभ) की तीव्रता कम होकर, हृदय में सभी के प्रति मैत्री और स्नेह का झरना प्रवाहित हो। भजन में स्पष्ट संदेश दिया गया है कि जब तक जीवन में मनमुटाव और झगड़े (रगड़े) बने रहेंगे, तब तक जीव पावन मोक्ष मार्ग पर अग्रसर नहीं हो सकता और पुण्य कमाने का अवसर खोता रहेगा। इसलिए, क्षमा को वीरों का आभूषण बताया गया है, जो वैर-भाव और कटुता को समाप्त करती है। भजन अंत में सच्चे मन से एक-दूसरे को माफ करने और मिच्छामि दुक्कड़म (मेरे द्वारा किए गए दुष्कृत्य क्षमा हों) का आह्वान करने की विनती करता है, ताकि जाने-अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए माफी मांगकर जीवन को चंदन के समान सुगंधित और शांतिपूर्ण बनाया जा सके।
Singer : Vaibhav Soni
Lyrics : Sangeeta bagrecha (Sangee)
Music Arrangement & Mixing : Akhil Purohit
Video : Mohit Soni
Lyrics : Sangeeta bagrecha (Sangee)
Music Arrangement & Mixing : Akhil Purohit
Video : Mohit Soni
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