बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे भजन

बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे भजन

बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे भजन
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे,
टाबर निरखे थारा सेवक निरखे,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे।

मोटी मोटी आंख्यां थारो तेज है निरालो,
सोने री या नथ माथे बोरलो यो प्यारो,
चांद सा सुंदर थारो मुखड़ो चमके,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे।

बंधेज री या साड़ी देखो लाल सुरंगी,
माथे ऊपर सोए थारे तारा री या चुनरी,
आंख्यां में बस गई दादी सूरत या थारी,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे।

सरब सुहागण थारे मंदिरये में आई,
सब मिल थारे दादी मेहंदी ये लगाई,
भक्तां री मेहंदी दादी लागे थाने प्यारी,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे।

चुन चुन फूल दादी गजरो बनायो,
पहनो म्हारी दादी आशीष मन सूं लायो,
सब मिल थाने सजावा बैठो म्हारी मां,
बनड़ी सी लागो थे मां थारा टाबर निरखे।


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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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