शून्य से लेकर मुझे तूने उठाया प्रभु सांग
शून्य से लेकर मुझे तूने उठाया प्रभु सांग
शून्य से लेकर मुझे
तूने उठाया प्रभु
तेरा प्रेम करके स्मरण
आभारी मेरा मन
तेरा प्रेम पाऊँ मै
एसी कोई खूबी नही
मुझको तू याद करे
एसी लियाकत नहीं
पीढ़ी दर पीढ़ी से
रहनुमाई करने वाला
तेरे प्रेम की गहराई
क्या कोई समझ पाया
व्याकुलता के समय
शांति देनेवाला
चिंताओं को मिटा
आनंद से भरनेवाला
तूने उठाया प्रभु
तेरा प्रेम करके स्मरण
आभारी मेरा मन
तेरा प्रेम पाऊँ मै
एसी कोई खूबी नही
मुझको तू याद करे
एसी लियाकत नहीं
पीढ़ी दर पीढ़ी से
रहनुमाई करने वाला
तेरे प्रेम की गहराई
क्या कोई समझ पाया
व्याकुलता के समय
शांति देनेवाला
चिंताओं को मिटा
आनंद से भरनेवाला
Shoony Se Lekar Mujhe II Alexander Thomas II Live Sunday Worship
शून्य से उठाकर प्रभु ने हाथ थामा, तो लगता है जैसे जीवन की हर सांस में उनकी कृपा घुली हुई है। वो प्रेम इतना गहरा है कि स्मरण करते ही मन आभारी हो उठता है, आँखें भर आती हैं। हमारी कोई खूबी नहीं, कोई लायक़ी नहीं, फिर भी वो याद करते हैं, बुलाते हैं, पास बिठाते हैं। ये प्रेम पाने की कोई योग्यता नहीं, बस उनकी दया है जो बिना किसी हिसाब के बरसती रहती है।पीढ़ी-दर-पीढ़ी वो राह दिखाते आए हैं, मार्गदर्शन करते आए हैं। उनकी प्रेम की गहराई इतनी अनंत है कि कोई भी पूरी तरह समझ नहीं पाता। व्याकुलता के पलों में जब मन डूबने लगता है, वो शांति की बूँदें बरसाते हैं। चिंताएँ जो बोझ बनकर दबाती हैं, उन्हें मिटाकर आनंद से भर देते हैं। बस एक बार नाम लिया, और वो मौजूदगी महसूस हो जाती है – जैसे हर दुख के बाद सुबह की पहली किरण की तरह आ जाते हैं।
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