मेरी अम्बे मैया आओ मेरे मकान में भजन
मेरी अम्बे मैया आओ मेरे मकान में भजन
(मुखड़ा)
मेरी अम्बे मैया आओ,
मेरी कालका मैया आओ मेरे मकान में,
मेरी अम्बे मैया आओ मेरे मकान में,
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 1)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लाल चुनर लाई,
मैं प्रेम से ओढ़ाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 2)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लाल चूड़ा लाई,
मैं प्रेम से पहनाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 3)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं पुष्प हार लाई,
मैं प्रेम से सजाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 4)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं फल आहार लाई,
मैं प्रेम से भोग लगाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 5)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लौंग कपूर लाई,
मैं प्रेम से जगाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 6)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं धूप दीप लाई,
तुम आके दर्शन दिखाओ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(पुनरावृत्ति - समापन)
मेरी अम्बे मैया आओ,
मेरी कालका मैया आओ मेरे मकान में,
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
मेरी अम्बे मैया आओ,
मेरी कालका मैया आओ मेरे मकान में,
मेरी अम्बे मैया आओ मेरे मकान में,
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 1)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लाल चुनर लाई,
मैं प्रेम से ओढ़ाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 2)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लाल चूड़ा लाई,
मैं प्रेम से पहनाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 3)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं पुष्प हार लाई,
मैं प्रेम से सजाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 4)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं फल आहार लाई,
मैं प्रेम से भोग लगाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 5)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं लौंग कपूर लाई,
मैं प्रेम से जगाऊँ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(अंतरा 6)
मैया तुम्हारे वास्ते,
मैं धूप दीप लाई,
तुम आके दर्शन दिखाओ,
मेरे मकान में।
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
(पुनरावृत्ति - समापन)
मेरी अम्बे मैया आओ,
मेरी कालका मैया आओ मेरे मकान में,
तेरी जगमग ज्योति जागे सारे जहान में,
मेरी अम्बे मैया आओ।।
मेरी अम्बे मईया आओ । Meri Ambey Maiya Aao । माता रानी भजन
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भक्त का हृदय माँ अम्बे के आगमन की प्रतीक्षा में प्रेम और श्रद्धा से भरा है, जो उनके स्वागत के लिए हर संभव तैयारी करता है। वह अपने घर को माँ के लिए सजाता है, मानो वह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि उसका मन मंदिर है, जहाँ माँ की ज्योति का प्रकाश सारे संसार को आलोकित करता है। लाल चुनर, चूड़ा, पुष्पहार, फल, लौंग-कपूर और धूप-दीप के साथ भक्त का प्रेम उसकी सादगी और समर्पण में झलकता है। यह भक्ति का वह रूप है, जो माँ के प्रति पूर्ण निष्ठा को दर्शाता है, जहाँ भक्त अपनी हर छोटी-बड़ी भेंट को प्रेम के साथ अर्पित करता है, यह विश्वास रखते हुए कि माँ की कृपा उसके घर और जीवन को सदा सुख-शांति से भर देगी।
माँ की ज्योति का यह आलोक केवल भक्त के घर तक सीमित नहीं, बल्कि यह समस्त संसार में फैलता है, जो हर हृदय में आशा और विश्वास की किरण जगाता है। भक्त की यह पुकार कि माँ उसके मकान में पधारें, केवल एक शारीरिक उपस्थिति की कामना नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक सान्निध्य की चाह है, जो उसके जीवन को माँ की ममता और शक्ति से संवार दे। हर भेंट, चाहे वह फूल हो या दीप, भक्त के मन की शुद्धता और माँ के प्रति उसके अनन्य प्रेम का प्रतीक है। यह भक्ति का वह उत्सव है, जो माँ के दर्शन और उनकी कृपा को भक्त के जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बनाता है, और उसे यह अहसास कराता है कि माँ सदा उसके साथ हैं, उसके हर भाव को सुनकर और स्वीकार कर।
माँ की ज्योति का यह आलोक केवल भक्त के घर तक सीमित नहीं, बल्कि यह समस्त संसार में फैलता है, जो हर हृदय में आशा और विश्वास की किरण जगाता है। भक्त की यह पुकार कि माँ उसके मकान में पधारें, केवल एक शारीरिक उपस्थिति की कामना नहीं, बल्कि उस आध्यात्मिक सान्निध्य की चाह है, जो उसके जीवन को माँ की ममता और शक्ति से संवार दे। हर भेंट, चाहे वह फूल हो या दीप, भक्त के मन की शुद्धता और माँ के प्रति उसके अनन्य प्रेम का प्रतीक है। यह भक्ति का वह उत्सव है, जो माँ के दर्शन और उनकी कृपा को भक्त के जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य बनाता है, और उसे यह अहसास कराता है कि माँ सदा उसके साथ हैं, उसके हर भाव को सुनकर और स्वीकार कर।
नवरात्रि का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक महत्व दोनों ही अत्यंत गहरा है। वैज्ञानिक दृष्टि से, नवरात्रि वर्ष में दो बार ऋतु परिवर्तन (मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर) के समय आती है, जब मौसम बदलने से शरीर पर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन दिनों उपवास रखने, सात्विक आहार लेने, सफाई रखने और ध्यान-योग करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर शुद्ध होता है। उपवास से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और मन भी तनावमुक्त होता है।
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Author - Saroj Jangir
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