पूनम की है रात दादा आज थाने आणो है

पूनम की है रात दादा आज थाने आणो है

 
पूनम की है रात दादा आज थाने आणो है

आवो नी भैंरुजी म्हारे,
आंगनिये एक बार,
भैंरुजी मैं करा थोरी,
घणी घणी मनुहार।

पूनम की है रात,
पूनम की है रात दादा,
आज थाने आणो है,
थाने कोल निभाणो है।

दरबार ओ दादा,
एसो सज़्यो प्यारो,
दयालु आपरो,
सेवा में ओ दादा,
सग़ला खड़्या दिखे,
हुकुम बस आपरो,
सेवा में थारी,
सेवा में थारी,
म्हाने आज बीछ ज़ाणो है,
थाने कोल निभाणो है।

भक्ति की तैयारी,
भक्ति करा जमकर,
दादा क्यू देर करो,
वादो थारो दादा,
भक्ति में आणे को,
घणी क्यू देर करो।

जो वादा किया वो,
निभाना पड़ेगा,
भक्तों ने तुमको पुकारा,
आज ओ दादा,
तुमको आना पड़ेगा,
जो वादा किया वो,
निभाना पड़ेगा।

भजना सू थाने,
भजना सू थाने,
म्हाणे आज रिझाणो है,
थाने कोल निभाणो है।

जो कुछ बन्यो म्हासु,
अर्पण प्रभु सारो,
दादा स्वीकार करो,
नादान सू गलती,
होती ही आयी है,
घणी क्यू देर करो,
नंदू सांवारिया,
वैभव ओं दादा थारो,
दास पुरानो है,
थाने कोल निभाणो है,
पूनम की है रात,
पूनम की है रात,
दादा आज थाने आणो है,
थाने कोल निभाणो है।


पूनम की है रात || Poonam Ki Hai Raat || VAIBHAV SONI || Latest Superhit Bhajan Nakoda Bheruji 2021 
 
Singer - Vaibhav Soni
Lyrics - Nandu Ji
Music Arrangement & Mixing - Akhil Purohit ‪@shreeraatimusic‬ 
Keyboard Music - Naresh Rao & Mohit Soni 
Chorus - Akhil Purohit & Meena Mali 
Cinematography - Mukesh Paliwal (The Third Eye photography 9636394957) 
Inspirer - Kishor Ji Devda , Vaibhav Ji Bagmar , Manoj Ji Shobhawat
Location - The Justa Resort , Nathdwara
 
भैरव बाबा के प्रति यह पुकार भक्त की उस गहरी तड़प का प्रतीक है, जिसमें साधक चाहता है कि उसका आंगन उनके दिव्य चरणों से पावन हो जाए। पूनम की रात वैसे ही उज्ज्वल और पवित्र मानी जाती है, और इस उजास में जब भक्त अपने आराध्य को बुलाता है तो यह साधारण आमंत्रण नहीं होता, बल्कि प्रेम, आस्था और समर्पण की पराकाष्ठा होती है। भक्ति में मनुहार का यही भाव देवता को बाध्य कर देता है कि वे अपने भक्त के समीप प्रकट हों।

दादा भैरुजी करुणा और न्याय के देव हैं, और उनके दरबार में सब समान रूप से खड़े होते हैं—कोई बड़ा-छोटा नहीं रह जाता। सजाया हुआ दरबार भक्तों का प्रेम और सेवा का प्रतीक है, जहाँ केवल एक ही हुकुम चलता है—भक्ति और सच्चे भाव का। भक्त बार-बार उन्हें याद दिलाता है कि आपने वचन दिया है और भक्तों की पुकार कभी व्यर्थ नहीं जाती। यह स्मरण एक आत्मीय संवाद है, मानो भक्त अपने आराध्य को कह रहा हो कि देर मत करो, अब तो आकर अपनी उपस्थिति से साधना को सफल करें। 
 
 
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