उबी मैं सरवर तीर राजस्थानी भजन
उबी मैं सरवर तीर राजस्थानी भजन
ब्रहणी बैठी पीहर में,
पियो बसे परदेश।
खान-पान सब त्यागिया रे,
त्यागिया वस्त्र-वेश पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
धूणी धूखे ज्यूँ काळजो रे,
जळ-जळ गयो रे शरीर।
मछली ज्यूँ तड़पत फिरूँ रे,
कद होसी समंदर सीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
सूता नी आवे नींदड़ी रे,
जागूँ तो नहीं रे सुहाय।
विरह काले नाग ज्यूँ रे,
काढ काळजो खाय सजन म्हारा,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
बेदरदी पिया, दया नहीं आई रे,
विरह गयो रे लगाय।
कयो चरणां रे माँय राखसु जी,
अध बीच दीवी छिटकाय पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
रूप-स्वरूप आपरो है,
ज्यां ने झुर रही ब्रहणी अनेक।
सिमरत दासी आपरी रे,
अरे दया हमारी देख सजन म्हारा,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
पियो बसे परदेश।
खान-पान सब त्यागिया रे,
त्यागिया वस्त्र-वेश पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
धूणी धूखे ज्यूँ काळजो रे,
जळ-जळ गयो रे शरीर।
मछली ज्यूँ तड़पत फिरूँ रे,
कद होसी समंदर सीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
सूता नी आवे नींदड़ी रे,
जागूँ तो नहीं रे सुहाय।
विरह काले नाग ज्यूँ रे,
काढ काळजो खाय सजन म्हारा,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
बेदरदी पिया, दया नहीं आई रे,
विरह गयो रे लगाय।
कयो चरणां रे माँय राखसु जी,
अध बीच दीवी छिटकाय पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
रूप-स्वरूप आपरो है,
ज्यां ने झुर रही ब्रहणी अनेक।
सिमरत दासी आपरी रे,
अरे दया हमारी देख सजन म्हारा,
उबी मैं सरवर तीर।
नैणा सूँ ढलक्यो नीर पियाजी,
उबी मैं सरवर तीर।।
ऊबी में तो सरवर तीर | ब्रेहणी भजन | Ubhi Me To Sarvar Tir | bareni Bhajan | Shyam Das vaishnav
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Admin - Saroj Jangir
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