राम भजलो प्राणियां अवसरियो बित्यो जावे

राम भजलो प्राणियां अवसरियो बित्यो जावे रे

राम भजलो प्राणियां अवसरियो बित्यो जावे रे

राम भजलो प्राणियां
अवसरियो बित्यो जावे रे
आछी रे करणी सूं पायो मानखो

राम नाम धन छोड़ पड़ीयो
ज्याने क्यों नहीं लूटो रे
खरची आगोतर वाली बांधवो

धन रे जोबन रो बंदा
मत कर तू अभिमान रे
काया रे छोड़ जिवडो जावसी

पर तिरिया ने माता समझो
पर धन धूल समान रे
एडा रे गुणा न जिवडो धारले

पगा बलती दिखे कोनी
डूंगर बलता दिखे रे
एडा रे गुणा न जिवडो छोड़दे

कहत कबीर सुणो भाई साधो
सुणजो चित लगाय रे
साधा री संगत में आवो प्रेम सूं

राम भजलो प्राणियां
अवसरियो बित्यो जावे रे
आछी रे करणी सूं पायो मानखो



"राम भजले प्राणिया,अवसरियो बितो जावे रे"- पूज्य संत श्री सुखदेवजी महाराज। Sukhdev Ji Maharaj Kuchera

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भक्तों को राम नाम के जप में लीन होने, अच्छे कर्म करने, और जीवन की क्षणभंगुरता को समझने का संदेश देता है। भजन की पंक्तियाँ, जैसे "राम नाम धन छोड़ पड़ीयो" और "साधा री संगत में आवो प्रेम सूं", श्री राम की भक्ति को जीवन का अनमोल रत्न बताती हैं, जो सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। कबीर जैसे संतों का उल्लेख इस भजन में भक्ति और साधु-संगति के महत्व को और गहरा करता है। नवरात्रि जैसे पवित्र अवसरों पर यह भजन मंदिरों में गूंजता है, जहाँ भक्त श्री राम की कृपा और उनके आदर्शों से प्रेरित होकर अपने जीवन को सार्थक बनाने का संकल्प लेते हैं। यह भजन भक्तों को अभिमान त्यागने और प्रेम व श्रद्धा के साथ राम भक्ति में डूबने का आह्वान करता है।
 
❖Album : Sant Vani
❖Singer : Sant Sukhdev Ji Maharaj
❖Lyrics : Traditional
❖Music : Imamudeen Ji Mundwa
❖Recoding : Mahadev Digital Nadsar, KK Studio Bhopalgarh
❖Editor : Hanuman Jangid
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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