मन में जप श्री राम रे बन्दे रोज सुबह और शाम

मन में जप श्री राम रे बन्दे रोज सुबह और शाम

मन में जप श्री राम रे बन्दे रोज सुबह और शाम

मन में जप श्रीराम रे बंदे,
रोज़ सुबह और शाम,
ये हनुमत का कहना,
ले ले जो ये नाम प्रभुजी,
उसके बन जाए काम,
ये हनुमत का कहना।

शबरी की भक्ति न्यारी,
तरसे दर्शन को बेचारी,
राम खुद ही आ गए
देख मनुहार को,
शबरी के प्यार को,
झूठे बेर खा गए।
जपते जपते राम-राम वो,
वो पहुँची उनके धाम,
ये हनुमत का कहना,
मन में जप श्रीराम रे बंदे,
रोज़ सुबह और शाम,
ये हनुमत का कहना।

नल नील दोनों भाई,
ऐसी एक शक्ति पाई,
करिश्मा दिखा दिया।
पत्थर थे भारी अजूबे,
फेंके पानी में न डूबे,
पुल ही बना दिया।
रहे पत्थर न वो आम,
कि उन पे लिख दिया था श्रीराम,
ये हनुमत का कहना,
मन में जप श्रीराम रे बंदे,
रोज़ सुबह और शाम,
ये हनुमत का कहना।

विभीषण का भाग्य जगाया,
सुग्रीव मित्र बनाया,
ये तो सभी जानते हैं।
नाम की महिमा भारी,
राम की है महिमा सारी,
देव भी ये मानते हैं।
सौंप दे जीवन आज के पन्ना,
गिरे तो ले तुझे थाम,
ये हनुमत का कहना,
मन में जप श्रीराम रे बंदे,
रोज़ सुबह और शाम,
ये हनुमत का कहना।

मन में जप श्रीराम रे बंदे,
रोज़ सुबह और शाम,
ये हनुमत का कहना,
ले ले जो ये नाम प्रभुजी,
उसके बन जाए काम,
ये हनुमत का कहना।


मन में जप श्री राम रे बन्दे रोज़ सुबह और शाम | Hanuman Bhajan | Man Mein Jap Shri RAm | Mukesh Bagda

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जब कोई मनुष्य अपने भीतर बार‑बार उस नाम को जपता है, तो वह केवल शब्द नहीं दोहराता — वह अपने जीवन को उस नाम के अर्थ में ढालने लगता है। यह विश्वास हनुमान जैसे अदम्य भक्त का आह्वान है, जो जान चुका है कि जहां राम नाम है, वहीं सब समाधान हैं। जब हनुमान कहते हैं कि ‘नाम लो और काम बन जाए’, तो यह कोई चमत्कारिक वाक्य नहीं, बल्कि अनुभव का सार है — जिसने प्रेम से जप किया, उसके जीवन में दिशा स्वयं भगवान बन कर उतर आती है। जैसे शबरी ने केवल प्रतीक्षा की, फिर भी राम स्वयं चलकर उसके द्वार आए — क्योंकि भक्ति में समय व्यर्थ नहीं जाता, हर क्षण प्रभु की आने की तैयारी होती है।

राम नाम में वह शक्ति है जो निर्जीव को भी जीवंत बना देती है — यही नल‑नील की कहानी में झलकता है। जिन पत्थरों पर राम नाम अंकित हुआ, वे तैर उठे; यही संकेत है कि जीवन जितना भी भारी क्यों न लगे, अगर उस पर राम का नाम अंकित हो जाए तो वह डूब नहीं सकता। हनुमान का यह कथन केवल उपदेश नहीं — प्रेम का निमंत्रण है। वह कहते हैं, “बस मन में जप ले, सुबह शाम राम कह ले”, क्योंकि यही जप आत्मा को थाम लेता है। जो गिर भी जाए, उसे फिर उठा लेता है। यह वह शक्ति है जो सुग्रीव को मित्र बनाती है, विभीषण को राज सिंहासन दिलाती है, और एक साधारण हृदय को भी दिव्य बना देती है। अंत में केवल यही बचता है — विश्वास, समर्पण और वह मधुर पुकार, “मन में जप श्रीराम रे बंदे…”

Song: Man Mein Jap Shri Ram Re Bande
Singer: Mukesh Bagda
Category: HIndi Devotional (Hanuman Bhajan)
Producers: Amresh Bahadur - Ramit Mathur
Label : Yuki

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