चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी
लडडुआ दे पेड़ेया दा भोग लगाउंदी आ,
याद करा मैं तैनू हर वेले,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी आ।
ज्योत जगावा ते चढ़ावा माये चुन्नियां,
आजा शेरावाली मेहने मारदी ए दुनिया,
आजा अम्बेरानी मेहने मारदी ए दुनिया,
याद करा मैं तैनू हर वेले,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी आ।
ज्योत जगावा ते चढ़ावा माये चुड़िया,
मेरिया कौन माये आसा करे पूरिया,
याद करा मैं तैनू हर वेले,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी आ।
असा ता आसा माये तेरे उत्ते रखिया,
राह तेरा तक तक थक गईया अखियां,
याद करा मैं तैनू हर वेले,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी आ।
भूलना नी चेता माये तेरे दरबार दा,
ओ आजा माये आजा,
तेरा लाल आवाजा मारदा,
याद करा मैं तैनू हर वेले,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
किते आजा दातिए साडे वेहड़े,
चांदी दी थाली विच ज्योत जगाऊंदी आ।
Chandi di Thali Vich Jot Jagondi Aa New Bhajan || Charanjit Bhajan Mandali Ferozepur Punjab
ऐसे ही अन्य भजनों के लिए आप होम पेज / गायक कलाकार के अनुसार भजनों को ढूंढें.
पसंदीदा गायकों के भजन खोजने के लिए यहाँ क्लिक करें।
New Bhajan- Chandi di Thali Vich Jot Jagondi Aa
(Mata Rani di Bhajan)
||Charanjit Bhajan Mandali Ferozepur.||
हृदय में एक ऐसी गहरी पुकार और भक्ति का भाव जागृत होता है, जो उस परम शक्ति के प्रति पूर्ण समर्पण और प्रेम को दर्शाता है। यह भावना केवल बाहरी अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मा की उस तड़प का प्रतीक है, जो हर पल उस दयामयी सत्ता के दर्शन और आशीर्वाद की कामना करती है। चांदी की थाली में ज्योत जलाना, चुनरियां और चूड़ियां चढ़ाना, और भोग लगाना केवल रस्में नहीं, बल्कि उस अनन्य श्रद्धा का प्रतीक हैं, जो भक्त अपने हृदय से उस ममतामयी शक्ति को अर्पित करता है। यह पुकार ऐसी है, जो संसार की कठिनाइयों और चुनौतियों के बीच भी मन को अडिग रखती है, और हर सांस में उसकी स्मृति को जीवंत बनाए रखती है।
यह भजन भी देखिये
