राम बुलावा भेजिया दिया कबीरा रोय मीनिंग
राम बुलावा भेजिया दिया कबीरा रोय हिंदी मीनिंग
राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय ।जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय ।
Ram Bulava Bhejiya, Diya Kabira Roy,
Jo Sukh sadhu Sang Me, So Baikunth Na Hoy.
कबीर के दोहे का हिंदी मीनिंग (अर्थ/भावार्थ) Kabir Doha (Couplet) Meaning in Hindi
राम ने बुलावा भेजा है, कबीर साहेब इसको देखकर विलाप करने लगे हैं। जो सुख साधुजन की संगति में है, वह स्वर्ग में भी नहीं हो सकती है। आशय है की एक रोज सभी को ईश्वर के प्राप्त जाना है, ऐसे में कबीर साहेब को दुःख है की साधु संगत में जो सुख है वह किसी भी अन्य में नहीं हो सकती है। साधू संगत को साहेब ने सर्वोच्च स्थान दिया है। इस दोहे में कबीर दास जी ने संत और सज्जनों की संगति की महिमा का वर्णन किया है। वे कहते हैं कि जब मृत्यु का समय आया और राम के दूतों ने उन्हें बुलाया, तो वे रो पड़े। इसका कारण यह था कि उन्हें पता था कि वह अब संत और सज्जनों की संगति से दूर हो जाएंगे। उनके साथ रहने में जो आनंद था, वह किसी भी अन्य आनंद से अधिक था, यहां तक कि स्वर्ग के आनंद से भी।
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
आपको ये पोस्ट पसंद आ सकती हैं
|
Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
