बाजे कुण्डलपुर में बधाई जैन भजन
बाजे कुण्डलपुर में बधाई जैन भजन
बाजे कुण्डलपुर में बधाई,
के नगरी में वीर जन्में महावीर जी,
जागे भाग हैं त्रिशला मां के,
के त्रिभवन के नाथ जन्में महावीर जी।
हो शुभ घड़ी जन्म की आई,
स्वर्ग से देव आये महावीर जी,
तेरा नवन करें मेरु पर,
के इंद्र जल भर लाए महावीर जी।
हो तुझे देवीआं झुलाये पलना,
मन में मगन हो के महावीर जी,
तेरे पलने में हीरे मोती,
के गोरिओं में लाल लटके महावीर जी।
हो अब ज्योति तेरी जागी,
के सूर्य चाँद छिप जाए महावीर जी,
तेरे पिता लुटावें मोहरें,
खजाने सारे खुल जायेंगे महावीर जी।
हो हम दरश को तेरे आए,
के पाप सब काट जाएंगे महावीर जी,
बाजे कुण्डलपुर में बधाई,
के नगरी में वीर जन्में महावीर जी।
Baje Kundalpur Me Badhayi (Mahaveer Bhajan)
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महावीर स्वामी ने जैन धर्म के उन मूल तत्वों की स्थापना की, जो आज भी इसके केंद्रीय सिद्धांत माने जाते हैं। उनका जन्म वर्धमान महावीर के नाम से हुआ और वे जैन परंपरा के अनुसार चौबीसवें एवं अंतिम तीर्थंकर थे। उन्होंने मानव जीवन के कल्याण हेतु अपने उपदेशों द्वारा पाँच महाव्रतों को विशेष रूप से प्रतिपादित किया: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), ब्रह्मचर्य (इंद्रियों का संयम) और अपरिग्रह (संपत्ति का त्याग)।
