मां नसीब से ज्यादा दे रही है भजन
बिन पानी के नाव खे रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
भूखें उठते है भूखे तो सोते नहीं,
दुःख आता है हम पे तो रोते नहीं,
दिन रात खबर ले रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
उसके लाखों दीवाने बड़े से बड़े,
उसके चरणों में कंकर के जैसे पड़े,
फिर भी आवाज मेरी सुन रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
मेरा छोटा सा घर महलों की रानी मां,
मेरी औकात क्या महारानी है मां,
साथ बनवारी मां रह रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
ज्यादा कहता मगर कह नहीं पा रहा,
आंसू बहता मगर बह नहीं पा रहा,
दिल से आवाज ये आ रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
बिन पानी के नाव खे रही है,
मां नसीब से ज्यादा दे रही है।
माँ नसीब से ज्यादा दे रही है | Maa Naseeb Se Jyada De Rahi Hai | Mata Rani Ke Bhajan | Mata Bhajan
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Author - Saroj Jangir
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