कबीर खालिक जागिया और न जागै कोइ मीनिंग
कबीर खालिक जागिया और न जागै कोइ हिंदी मीनिंग
कबीर खालिक जागिया, और न जागै कोइ।Kabir Kahik Jagiya, Aur Na Jage Koi,
Ke Jage Vishai Vish Bharaya, Ke Daas Bandagi Hoi.
कबीर के दोहे का हिंदी मीनिंग (अर्थ/भावार्थ) Kabir Doha (Couplet) Meaning in Hindi
इस दोहे में कबीर साहेब का सन्देश है की इस जगत में जाग्रत अवस्था में मेरा स्वामी ही है। दुनिया तो गहरी निंद्रा में सो रही है। इस जगत में सभी माया के भरम की निंद्रा में सो रहे हैं। ऐसी में साधक जो ईश्वर की भक्ति में रत रहता है वह ही जाग्रत अवस्था में है। ईश्वर की भक्ति ही जाग्रत अवस्था है।
इस सुंदर दोहे में कबीर साहब मन को वह सत्य समझाते हैं कि इस संसार में सच्ची जागृति केवल परमात्मा की भक्ति में ही है। सारा जग माया के भ्रम में डूबा हुआ, जैसे गहरी नींद में सोया हो, लेकिन जो मन प्रभु की बंदगी में लीन रहता है, वही सही मायने में जागा हुआ है। जैसे कोई साधक रात-दिन प्रभु के नाम में डूबकर अपने मन को माया के विष से मुक्त रखता है, वही जीवन की सच्ची समझ पाता है। यह दोहा मन को झकझोरता है कि सांसारिक मोह छोड़कर प्रभु की भक्ति में जाग जाओ, क्योंकि यही जागृति जीवन को शांति और सत्य की राह दिखाती है।
Kabir Sahib's message is that in this world, my true master is in the awakened state, while the rest of the world sleeps in deep slumber. In this world, everyone is asleep in the illusion of Maya. In such a scenario, only the practitioner who remains engrossed in devotion to the Divine is truly awake.
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं कबीर के दोहों को अर्थ सहित, कबीर भजन, आदि को सांझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
