सोवणी द्वारका सु रामदेव पधारीया भजन

सोवणी द्वारका सु रामदेव पधारीया Sovani Dwarka Su Ramdev Bhajan


 
सोवणी द्वारका सु रामदेव पधारीया लिरिक्स Sovani Dwarka Su Ramdev Bhajan Lyrics

सोवणी द्वारका सु,
रामदेव पधारीया,
भलो कियो तंवरा रो जी,
माता मेणादे री आसा पुरी,
भाणु जिवायो सुगना रो,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।

बड़ा विरम देव छोटा धणी रामदेव,
जोड़ भलो भाया रो जी,
रूपा दे रे आराध्य आया बाबा,
भरीयो धाल फुला रो जी,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।

द्रोपदी सति रो चीर बढायो,
आम्बो फळीयो पांडवा री,
नरसी भगत रो माहिरो भरीयो बाबा,
रथ अर्जुन रो हाख्यो जी,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।

पूंछ बांध ने आग लगाई जी,
आगे रावण बंको जी,
राजा रावण ने आप बिडारियो,
हनुमत किनो हाको जी,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।

गज री पुकार सुणी सागर में,
हेवर घोड़ो थांको जी,
दो कर जोड़ राजा मान सिंह बोले,
जुग जुग शरणे में राखो जी,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।

सोवणी द्वारका सु,
रामदेव पधारीया,
भलो कियो तंवरा रो जी,
माता मेणादे री आसा पुरी,
भाणु जिवायो सुगना रो,
हाजर नौकर थारो बाबा,
हो हाजर नौकर थारो जी,
धजाबंद धणिया रो,
हाजर नौकर थारो जी।



Prabhati Bhajan भजन गायन - नरजी भाळू राजवा ॥ बाबा रामदेव जी प्रभाती भजन 2022 राजस्थानी प्रभाती भजन 

भगवान श्रीकृष्ण को द्वारिका का नाथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने स्वयं गुजरात के समुद्री तट पर एक भव्य नगरी का निर्माण करवाया था, जो यदुवंशियों का अभेद्य दुर्ग बन गई। महाभारत और पुराणों के अनुसार, मथुरा में कंस और जरासंध के अत्याचारों से बचने के लिए श्रीकृष्ण ने अपने वंशजों सहित पलायन किया और कुशस्थली नामक उजाड़ स्थान को पुनर्निर्मित कर द्वारिका बसाई। यह नगरी समुद्र से घिरी होने के कारण सुरक्षित थी, और श्रीकृष्ण इसके शासक, रक्षक तथा स्वामी बने रहे। यहां वे रुक्मिणी सहित अपनी पत्नियों के साथ राज्य करते थे, और यहीं से उन्होंने महाभारत युद्ध में पांडवों का साथ दिया। द्वारिका को उन्होंने अपने पूर्वजों की भूमि पर स्थापित किया, जो विष्णु के अवतार के रूप में उनकी दिव्य लीला का प्रतीक बनी। 

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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