तेरे भगत करने अरदासां झंडे वालिये भजन
तेरे भगत करने अरदासां झंडे वालिये भजन
तेरे भगत करने अरदासां,
तेरे भगत करने अरदासां,
झंडे वालिये,
कर पूरियां सब दीं आसां,
जोतां वालिये दातिये।
लालां वालिये लालां उप्पर,
नज़र मेहर दी रखीं,
रखीं पत्त गरीबां दी तूं,
सब दे पर्दे ढक़ीं,
माइये नी तैनू भुल ना जाईये,
नाम दीं दे दातां,
तेरे भगत करने अरदासां दातिये।
तेरे चरणां दा चरण अमृत,
लगे बड़ा स्वादि,
इक दो बूंदां नाल है दाति,
मिटे प्यास ना साड़ी,
बैठ के तेरे साहमणे दाति,
पीना असां गिलासां,
तेरे भगत करने अरदासां दातिये।
इक वारी तूं, राणीये सानूं,
गोदी विच बिठा लै,
सेवा तेरी करनी असां फिर,
अरजी साड़ी ला लै,
सेवा तेरी करते दाति,
निकलन साडियां आसां,
तेरे भगत करने अरदासां।
ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਕਰਨ ਅਰਦਾਸਾਂ,
ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਕਰਨ ਅਰਦਾਸਾਂ,
ਝੰਡੇ ਵਾਲੀਏ,
ਕਰ ਪੂਰੀਆਂ ਸਭ ਦੀਆਂ ਆਸਾਂ,
ਜੋਤਾਂ ਵਾਲੀਏ,
ਦਾਤੀਏ।
ਲਾਲਾਂ ਵਾਲੀਏ, ਲਾਲਾਂ ਉੱਤੇ,
ਨਜ਼ਰ ਮੇਹਰ ਦੀ ਰੱਖੀਂ,
ਰੱਖੀਂ ਪੱਤ, ਗਰੀਬਾਂ ਦੀ ਤੂੰ,
ਸਭ ਦੇ ਪਰਦੇ ਢੱਕੀਂ,
ਮਾਈਏ ਨੀ, ਤੈਨੂੰ ਭੁੱਲ ਨਾ ਜਾਈਏ,
ਨਾਮ ਦੀਆਂ ਦੇ ਦਾਤਾਂ,
ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਕਰਨ ਅਰਦਾਸਾਂ ਦਾਤੀਏ।
ਤੇਰੇ, ਚਰਨਾਂ ਦਾ ਚਰਨ ਅਮ੍ਰਿਤ,
ਲੱਗੇ ਬੜਾ ਸਵਾਦੀ,
ਇੱਕ ਦੋ ਬੂੰਦਾਂ ਨਾਲ ਹੈ ਦਾਤੀ,
ਮਿਟੇ ਪਿਆਸ ਨਾ ਸਾਡੀ,
ਬੈਠ ਕੇ ਤੇਰੇ, ਸਾਹਮਣੇ ਦਾਤੀ,
ਪੀਣਾ ਅਸਾਂ ਗਿਲਾਸਾਂ,
ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਕਰਨ ਅਰਦਾਸਾਂ ਦਾਤੀਏ।
ਇੱਕ ਵਾਰੀ ਤੂੰ, ਰਾਣੀਏ ਸਾਨੂੰ,
ਗੋਦੀ ਵਿੱਚ ਬਿਠਾ ਲੈ,
ਸੇਵਾ ਤੇਰੀ ਕਰਨੀ ਅਸਾਂ ਫਿਰ,
ਅਰਜ਼ੀ ਸਾਡੀ ਲਾ ਲੈ,
ਸੇਵਾ ਤੇਰੀ ਕਰਦੇ ਦਾਤੀ,
ਨਿਕਲਣ ਸਾਡੀਆਂ ਆਸਾਂ,
ਤੇਰੇ ਭਗਤ ਕਰਨ ਅਰਦਾਸਾਂ।
तेरे भक्त करन अरदासां झण्डेवालिऐ,कर पूरिया सब दीया आसा झण्डेवालिऐ Suresh ji Vaishno Devi Bhajan
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Suresh ji Vaishno Devi Navratri Bhajan
SANDEEP PAL VAISHNO DEVI
SANDEEP PAL VAISHNO DEVI
दिल से निकली ये अरदास माँ के चरणों तक पहुँचती है, जहाँ झंडे लहराते हैं और ज्योतियाँ जलती रहती हैं। माँ की वो मेहर की नजर गरीबों पर, हर दुखी पर टिकी रहती है, सबके पर्दे ढकती है, नाम की दात देती है। चरणों का वो अमृत इतना मीठा लगता है कि दो-चार बूंदों से भी प्यास नहीं मिटती, बल्कि और गहरा हो जाता है। सामने बैठकर गिलास भर-भर पीने की तलब रहती है, जैसे वो अमृत जीवन की हर प्यास बुझा दे।
माँ को रानी कहकर पुकारते हुए गोदी में बिठाने की चाहत है, ताकि सेवा का मौका मिले, अरजी लगे और सारी आसें पूरी हों। सेवा करते-करते मन हल्का हो जाता है, हर इच्छा पूरी होने लगती है। माँ की वो करुणा इतनी गहरी है कि एक बार गोद में आने पर सारी दुनिया छोटी लगने लगती है, बस उनका साथ ही काफी हो जाता है।
माँ को रानी कहकर पुकारते हुए गोदी में बिठाने की चाहत है, ताकि सेवा का मौका मिले, अरजी लगे और सारी आसें पूरी हों। सेवा करते-करते मन हल्का हो जाता है, हर इच्छा पूरी होने लगती है। माँ की वो करुणा इतनी गहरी है कि एक बार गोद में आने पर सारी दुनिया छोटी लगने लगती है, बस उनका साथ ही काफी हो जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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