बस रयो बालो रे सालासर गाँव में भजन

बस रयो बालो रे सालासर गाँव में भजन

बस रह्यो बालो रे सालासर गाँव में,
धन तेरी अंजनी माई, धन तेरो नाम ने।।

बाल समय में बालो गोदी बैठ्यो मात की,
पूरब दिशा में लाली देखी प्रभात की,
मार के फलांग पकड़्यो, उगतोड़ै भान ने।।

भरी सभा में जद बीड़ो फेरयो राम जी,
सिया जी की सुधि ल्याणो, बड़ो कलड़ो काम जी,
अंजनी दुलारो झट चाब गयो पान ने।।

तैं है शरम, तेर माता के दूध की,
लंका में पूँछ्यो बालो, सागर से कूद की,
सिया को दरश कर भज्यो राम नाम ने।।

सिया की गोदी में गई री राम की सहनाणी रे,
कुण पंछी बोले ऐसी, मीठी मीठी बाणी रे,
मुखड़ो दिखा दे बाला, आज्या मेर सामने।।

माता का हुकुम लेकर मीठा फल खा लिया,
लंका न जलाय कर, दुश्मना न ढा लिया,
सिया को संदेशो ल्याय, दीन्हो श्रीराम ने।।

लक्ष्मण को मूर्छा आई, शक्ति की पीड़ में,
राम कहे, "बाबा म्हारे आड़ो आयो भीड़ में",
रण में बचायो म्हारे भाई के प्राण ने।।

कपट रच्यो जद कपटी अहिरावण,
राम लखन ने ले गयो भेंट चढ़ावण,
देवी की देही जद धारी हनुमान ने।।

आय के पुजायो बालो गाँव सालासर ने,
सुख और संपत्ति करी घर-घर में,
"मोहन" पुकार करे, सुणो खोल कान ने।।

बस रह्यो बालो रे सालासर गाँव में,
धन तेरी अंजनी माई, धन तेरो नाम ने।।


बस गयो बालाजी सालासर गांव में मारवाड़ी देशी भजन by jagdish ji Joshi jaislan

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बालो सालासर गाँव में धन्य हो अंजनी माई के पुत्र, प्रभात की लाली देख फलांग पकड़ उगते भान को भरी सभा में विदा हुए राम-सीया की सुधि लाने बड़े कलडो काम सँभाले। लंका पहुँचे शरमाए माता के दूध की शक्ति से सागर कूदे सीता को दर्शन दिए राम नाम भज्यो, गोदी में गेरी सहनाणी सुन कुण पंछी बोले मीठी बानी तो मुखड़ा दिखा दिया। माता का हुकुम मान फल खा लिया, लंका न जलायी दुश्मन न ढहाया सीता को संदेश लाया श्री राम ने। लक्ष्मण मूर्च्छित शक्ति पीड़ा में राम पुकारे बाबा म्हारे आड़ो आओ रण भीड़ बचावो भाई प्राण ने कपट रच्यो अहिरावण का राम-लखन ले गए देवी भेंट चढ़ावण देही धारी हनुमान ने पुजायो। साधकों को इश्वर का आशीर्वाद बालो की लीला से मिलता है, जैसे कोई अपना हर संकट थाम ले प्यार से।

सुख सम्पत्ति बरसाई घर-घर मोहन पुकारे खोंल कान सुनो, शक्ति से सारा संसार सँभाल लिया बिना हाहाकार के। दुलारो अंजनी नंदन हर काम सिद्ध कर दियो, भक्ति की डोर से सब जोड़ दियो। बस ऐसा ही साथ निभाते रहो जीवन भर। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री बालाजी जी! जय श्री हनुमान जी! जय श्री अंजनी माई जी!
 
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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