देख फरीदा थैया सकर होई विसु

देख फरीदा थैया सकर होई विसु Dekh Farida Je Thiyaa Shekh Farid Ji

देख फरीदा थैया सकर होई विसु Dekh Farida Je Thiyaa Shekh Farid Ji

कलाम शेख़ फ़रीद जी
देखु फरीदा जि थीआ सकर होई विसु ॥
सांई बाझहु आपणे वेदण कहीऐ किसु ॥
जोबन जांदे ना डरां जे सह प्रीति न जाइ ॥।
फरीदा कितीं जोबन प्रीति बिनु सुकि गए कुमलाइ ॥
फरीदा चिंत खटोला वाणु दुखु बिरहि विछावण लेफु ॥
एहु हमारा जीवणा तू साहिब सचे वेखु ॥
फरीदा तनु सुका पिंजरु थीआ तलीआं खूंडहि काग ॥
अजै सु रबु न बाहुड़िओ देखु बंदे के भाग ॥
कागा करंग ढंढोलिआ सगला खाइआ मासु ॥
ए दुइ नैना मति छुहउ पिर देखन की आस ॥
कागा चूंडि न पिंजरा बसै त उडरि जाहि ॥
जितु पिंजरै मेरा सहु वसै मासु न तिदू खाहि ॥
तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड बलंन्हि ॥
पैरी थकां सिरि जुलां जे मूं पिरी मिलंन्हि ॥
सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास ॥
इहु तनु लहरी गडु थिआ सचे तेरी आस ॥
 

Dekh Farida Je Thiyaa || Kalaam Shekh Farid Ji || Niranjan Saar ||


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देखु फरीदा जी थीआ सकर होई विषु:
फ़रीद जी कहते हैं कि देखो, मेरे अंदर मिठास की जगह अब विष भर गया है, और साईं (ईश्वर) के बिना अपना दर्द किससे कहूं?

साईं बाझहु आपणे वेदण कहीऐ किस:
उससे कहूं जो मेरा दर्द समझ सके, पर उसके बिना किससे अपना दर्द साझा करूं?

जोबन जांदे ना डरां जे सह प्रीति न जाइ:
फ़रीद जी कहते हैं, अगर प्रेम बना रहे तो जवानी जाने का डर भी नहीं होता।

फरीदा कितीं जोबन प्रीति बिनु सुकि गए कुमलाइ:
फ़रीद जी कहते हैं, वो जवानी जो प्रेम के बिना बीत गई, वो मुरझा गई और सूखी सी लगती है।

फरीदा चिंत खटोला वाण दुखु बिरहि विछावण लेफ:
फ़रीद जी कहते हैं, मेरे जीवन में चिंता, दुख और विरह का बिछावन है, और यही मेरा जीवन बन गया है।

एहु हमारा जीवणा तू साहिब सचे वेखु:
ये मेरा जीवन है, बस सच्चे साहिब को समर्पित है, जो सच्चा है, वही इसे देखे।

फरीदा तनु सुका पिंजरु थीआ तलीआं खूंडहि काग:
फ़रीद जी कहते हैं, मेरा शरीर अब सूखकर पिंजरा बन गया है और उस पर कौवे चोंच मार रहे हैं।

अजै सु रबु न बाहुड़िओ देखु बंदे के भाग:
अब तक मेरे अंदर रब नहीं लौटकर आया, देखो इंसान की किस्मत।

कागा करंग ढंढोलिआ सगला खाइआ मासु:
कौवे ने मेरा पूरा शरीर खा लिया है, पर इन दो आंखों को मत छूना, इनमें प्रिय के दर्शन की आस है।

कागा चूंडि न पिंजरा बसै त उडरि जाहि:
फ़रीद जी कहते हैं, कौवा अगर मेरे पिंजरे को छोड़ दे तो उड़ जाएगा, पर मेरे पिंजरे में मेरा प्रिय वास करता है, इसलिए इसके पास मत आना।

जित पिंजरै मेरा सहु वसै मासु न तिदू खाहि:
जिस पिंजरे में मेरा प्रिय है, उसके मांस को मत छूना, वो पवित्र है।

तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड्ड बलंन्हि:
मेरा शरीर तंदूर की तरह तप रहा है और हड्डियां जल रही हैं।

पैरी थकां सिरि जुलां जे मूं पिरी मिलंन्हि:
फ़रीद जी कहते हैं, मेरे पांव थक गए हैं और सिर पर बोझ महसूस हो रहा है, अगर मैं अपने प्रिय से मिल सकूं तो ये सब आसानी से सह लूंगा।

सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास:
फ़रीद जी कहते हैं, एक तालाब है और उसमें एक ही पंछी है, लेकिन उसे फंसाने वाले पचास हैं।

इहु तनु लहरी गडु थिआ सचे तेरी आस:
फ़रीद जी कहते हैं, ये शरीर एक बुलबुले की तरह है जो टूट जाएगा, और सच्चे में बस तेरी आस है।

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