मेरे प्राणेश मन मोहन तुम्हे ढूँढू कहाँ जाकर भजन
मेरे प्राणेश मन मोहन तुम्हे ढूँढू कहाँ जाकर भजन
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
बड़ा बेचैन हूं तुम बिन,
जरा देखो मुझे आकर,
जरा देखो मुझे आकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
तुम्हारी याद आते ही,
झड़ी आंसू की लग जाती,
तुम्हारी याद आते ही,
झड़ी आंसू की लग जाती,
तू फिर फिर दिल में आता है,
कि मर जाऊं ज़हर खाकर,
कि मर जाऊं ज़हर खाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
छिपे हो तुम कहां जाकर,
न आते हो बुलाने से,
छिपे हो तुम कहां जाकर,
न आते हो बुलाने से,
मज़ा क्या तुमको आता है,
मुझे इस तौर तड़पा कर,
मुझे इस तौर तड़पा कर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
न भूलूंगा कभी उपकार,
अपने उस हितैषी का,
न भूलूंगा कभी उपकार,
अपने उस हितैषी का,
जो करवा दे मुझे दर्शन,
कन्हैया को यहां लाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
प्रार्थना राम की तुमसे,
यही कर जोड़ विनती है,
प्रार्थना राम की तुमसे,
यही कर जोड़ विनती है,
लिपट जाऊं तुम्हीं से मैं,
तुम्हें आनंदघन पाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
बड़ा बेचैन हूं तुम बिन,
जरा देखो मुझे आकर,
जरा देखो मुझे आकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
बड़ा बेचैन हूं तुम बिन,
जरा देखो मुझे आकर,
जरा देखो मुझे आकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
तुम्हारी याद आते ही,
झड़ी आंसू की लग जाती,
तुम्हारी याद आते ही,
झड़ी आंसू की लग जाती,
तू फिर फिर दिल में आता है,
कि मर जाऊं ज़हर खाकर,
कि मर जाऊं ज़हर खाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
छिपे हो तुम कहां जाकर,
न आते हो बुलाने से,
छिपे हो तुम कहां जाकर,
न आते हो बुलाने से,
मज़ा क्या तुमको आता है,
मुझे इस तौर तड़पा कर,
मुझे इस तौर तड़पा कर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
न भूलूंगा कभी उपकार,
अपने उस हितैषी का,
न भूलूंगा कभी उपकार,
अपने उस हितैषी का,
जो करवा दे मुझे दर्शन,
कन्हैया को यहां लाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
प्रार्थना राम की तुमसे,
यही कर जोड़ विनती है,
प्रार्थना राम की तुमसे,
यही कर जोड़ विनती है,
लिपट जाऊं तुम्हीं से मैं,
तुम्हें आनंदघन पाकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
बड़ा बेचैन हूं तुम बिन,
जरा देखो मुझे आकर,
जरा देखो मुझे आकर,
मेरे प्राणेश मनमोहन,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर,
तुम्हें ढूंढूं कहां जाकर।।
मेरे प्राणेश श्री मनमोहन तुम्हे ढूंढू कहाँ जाकर !! पश्चिम विहार दिल्ली !! 9.11.2017 !! बृज भाव
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Admin - Saroj Jangir
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